My Favourite Author Essay in Hindi – हमारा देश भारत सदैव से ही विश्व गुरु रहा है, हमारे देश में ऐसे ऐसे विद्वान और महान लेखक जन्मे हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं से इतिहास रचा है, भारत ज्ञान का एक ऐसा समुद्र है जिसका अंत संभव नहीं। जब दुनिया को अक्षर का ज्ञान तक नहीं था उस समय से हमारे देश में विश्वविद्यालय स्थित रहे हैं। वैदिक काल से ही महान कवियों ने महान ग्रंथों की रचनाएं की है, और अपने ज्ञान को विश्व तक पहुंचाया है।

ऐसे कई सारे लोग होते हैं जिन्हें पढ़ने का शौक होता है तथा नए रचनाओं को गढ़ने का शौक होता है, महान कवि महान महाकाव्य का निर्माण करते हैं और विश्व को नई दिशा दिखाते हैं।

My Favourite Author Essay in Hindi

My Favourite Author Essay in Hindi – प्रस्तावना

किसी एक लेखक के प्रति निबंध लिखने के लिए कहा जाए तो यह मेरे लिए संभव नहीं, बचपन से ही मैंने सैकड़ों कवियों के ग्रंथों का अध्ययन किया है, इनमें से कुछ लेखक मेरे बेहद करीब हैं। इसी वजह से किसी एक के बारे में निबंध लिख पाना मेरे लिए संभव नहीं, मेरे जीवन में कई सारे लेखक के प्रभाव हैं जैसे आर के नारायण, मुंशी प्रेमचंद, रोबोट कियोसाकी आदि।

आर .के. नारायण

आर के नारायण इकलौते नोवलिस्ट है जो अपने समय में इंग्लिश भाषा में नॉवेल लिखा करते थे, इनकी लिखने की कला सभी लेखकों से विभिन्न थी, इसी वजह से मुझे इनकी रचनाएं अत्यधिक पसंद है। यह अपने किरदारों के माध्यम से लोगों के दिल तथा मन उतर जाते हैं इसीलिए उनकी रचनाएं सभी लोगों द्वारा पसंद की जाती है।

आर के नारायण का जन्म 1906 में मद्रास के एक छोटे से गांव में हुआ, आर के नारायण एक हिंदू ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे और इनका पूरा नाम राशिपुरम् कृष्णास्वामी अय्यर नारायणस्वामी है। बचपन से ही किताबों को पढ़ने में और नई चीजें सीखने में काफी रूचि रखते थे, अंग्रेजी साहित्य के प्रति इनका झुकाव अत्यधिक था इसीलिए भविष्य में इन्होंने अपने सभी रचनाएं अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की, इनकी प्रारंभिक शिक्षा लुथरन मिशनरी स्कूल से हुई।

स्कूल के दिनों में उनके साथ भेदभाव किया जाता था क्योंकि सभी बच्चे क्रिश्चियन थे और यह ब्राह्मण परिवार से संबंध रखते थे। इस घटनावों का उनके जीवन पर काफी प्रभाव पड़ा।

उन्होंने जितनी भी उपन्यास की रचनाएं की वह सभी अत्यधिक अच्छे थे, उनकी एक रचना स्वामी एंड फ्रेंड्स मुझे खासकर कर पसंद है, इसे पढ़ने पर लगता है किसके किरदार हमारे आसपास के लोग हैं। इसके अलावा कुछ रचनाएं जो अत्यधिक मुझे पसंद है तथा लोगों को पसंद आते हैं वह यह है – द वेण्डर ऑफ स्वीट्स, द इंग्लिश टीचर, द डार्क रूम, ‘मालगुडी डेज, अ हॉर्स एंड द गोट्स, ग्रांडमदर्स टेल, द वर्ल्ड ऑफ नागराज, आदि ।

आर के नारायण अपने समय के उच्चतम साहित्यकारों में से एक थे, इनकी रचनाएं सरल तथा आसान शब्दों में होती थी, इनकी रचनाएं के सभी पात्र आसपास के लोगों के चरित्र को दर्शाता था, इनकी लिखने की कला और कल्पना बाकी सभी लेखकों से विभिन्न थी, इस वजह से उन्हें कई सारे पुरस्कार से भी नवाजा गया, 1958 में साहित्य अकादमी अवार्ड दिया गया। 1964 में इन्हें पद्मभूषण से नवाजा गया और सन 2000 में पद्म विभूषण दिया गया।

मुंशी प्रेमचंद

अगर बात हिंदी साहित्य की, की जाए तो इसमें मुंशी प्रेमचंद मुझे अत्यधिक पसंद है। उनकी एक रचना है दिल को छू लेती है कहा जाता है कि इनकी कलम ने जिस जिस को छुआ उसे सोने में बदल दिया, हर बात को प्रदर्शन करने का इनका जो तरीका है वह सभी लेखकों से विभिन्न है।

मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 1880 में बनारस में हुआ, उनकी शुरुआती जीवन काफी कष्ट में बीता, जब वह 7 साल के थे तभी उनकी माता का देहांत हो गया और जब वह 14 वर्ष के हुए उनके पिता ने छोड़कर इस दुनिया से चले गए। 15 साल की आयु में उनका विवाह कर दिया गया, मगर विडंबना की बात यह है कि उनका विवाह सफल ना हो सका, फिर उन्होंने 1906 में विधवा विवाह का समर्थन करते हुए एक विधवा जिनका नाम शिवारानी था उनसे विवाह करना पड़ा। इनका जीवन दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुंशी प्रेमचंद ने जब लिखना शुरू किया तब वह नवाबराय नाम का इस्तेमाल किया करते थे, किंतु 1910 में उनकी लिखी हुई सभी कृतियों को जब्त कर लिया गया, और हमीरपुर के कलेक्टर ने उन्हें चेतावनी दी कि वह आगे नहीं नहीं लिख सकते। और अगर लिखने की कोशिश की तो उन्हें जेल जाना होगा।

उस वक्त तक मुंशी प्रेमचंद अपनी रचनाएं उर्दू भाषा में लिखा करते थे, मगर अपने एक मित्र के सलाह पर उन्होंने अपना नाम बदलकर प्रेमचंद रखा और प्रेमचंद नाम से ही अपनी रचनाएं प्रकाशित करने लगे।

अंतिम दिनों में गंभीर रूप से बीमार है होने के कारण उनका देहांत 1936 में हो गया, मुंशी प्रेमचंद की अंतिम रचना मंगलसूत्र अधूरी छूट गई थी, यह रचना प्रेमचंद द्वारा पूर्ण ना हो सका इस वजह से इसे उनके पुत्र अमृत राय ने पूरा किया।

मुंशी प्रेमचंद की रचनाएं

  • गबन 1931 में
  • गोदान 1936 में
  • सेवा सदन 1918 में
  • कर्मभूमि 1920 में
  • वरदान 1921 में
  • प्रेमाश्रम 1921 में

प्रेमचंद की कहानियां

  • पंच परमेश्वर
  • दो बैलों की कथा
  • ईदगाह
  • पूस की रात
  • सद्गति
  • बूढ़ी दादी
  • सप्त सरोज
  • नव निधि
  • प्रेम पूर्णिमा
  • प्रेम पच्चीसी
  • प्रेम प्रतिमा
  • प्रेम-द्वादशी
  • समर यात्रा
  • मानसरोवर
  • साहित्य का उद्देश्य
  • पुराना जमाना नया जमाना
  • स्वराज के फायदे
  • कहानी कला
  • कौमी भाषा के विषय में कुछ विचार
  • हिंदी उर्दू की एकता
  • महाजनी सभ्यता

मुंशी प्रेमचंद ऐसे लेखक थे जिनकी रचनाएं आज भी हमारे जीवन पर प्रभाव डालती है, इनकी जितनी प्रशंसा की जाए उतना कम है, दुनिया के कई भाषाओं में इनकी रचनाओं को ट्रांसलेट किया जाता है, ताकि पूरी दुनिया के लोग इनकी महान रचनाओं को पढ़ सके और ज्ञान प्राप्त कर सके।

Conclusion

मैंने अपने जीवन में कई सारे महान कवियों के रचनाओं को ध्यान से पढ़ा है, इस वजह से मेरे जीवन में ऐसे कई सारे महान कवि है जिनकी रचनाएं मुझे अत्यधिक पसंद है, मुंशी प्रेमचंद जी की रचनाएं मेरे जीवन पर प्रभाव डालती है, इसके अलावा भी कई सारे ऐसे लेखक हैं जिनकी रचनाएं मुझे अत्यधिक पसंद आती है रस्किन बॉन्ड, रहौंडा बर्न, आदि।

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