Lord Rama Essay in Hindi – प्रभु श्री राम अयोध्या के राजा दशरथ के सबसे बड़े पुत्र थे, महाराजा दशरथ की तीन रानियां थी कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा, बड़े ही जब तक के बाद राजा दशरथ को अपनी रानियों से 4 पुत्र हुए, सबसे बड़ा राम जिन्हें रानी कौशल्या ने जन्म दिया, भरत जिनको कैकेयी ने जन्म दिया और सुमित्रा ने लक्ष्मण कथा शत्रुघ्न को जन्म दिया।

भगवान विष्णु के अवतार में से एक प्रभु श्री राम का अवतार है, जिनका जन्म आदर्श प्रस्तुत करने के लिए तथा लोक कल्याण के लिए हुआ था, हिंदू धर्म में महानतम देवताओं में से एक देवता श्री राम को माना जाता है। प्रभु श्री राम विनम्रता, मर्यादा, पराक्रम, धैर्य, इन सभी का उदाहरण सर्वश्रेष्ठ रूप से प्रस्तुत करते हैं।

Lord Rama Essay in Hindi

Lord Rama Essay in Hindi – श्री राम का बचपन

प्रभु श्रीराम बचपन से ही विनय शील और सहृदयी रहे, प्रभु श्रीराम सबसे ज्यादा करीब अपने पिता राजा दशरथ के थे, उनका हर आदेश इनके लिए पत्थर की लकीर के समान था, माता कैकेयी को श्रीराम सबसे ज्यादा सम्मान तथा स्नेह देते थे, प्रभु श्रीराम के लिए सभी माता के समान थी, इसके अलावा श्री राम अपने सभी भाइयों का अधिक ध्यान रखते थे।

प्रभु श्री राम ने अपनी शिक्षा-दीक्षा गुरु वशिष्ठ के आश्रम में प्राप्त की, वह बेहद पराक्रमी थे, अपने बाल काल से ही प्रभु श्री राम ने अपनी वीरता का प्रदर्शन पूरे विश्व को दिया, आगे चलकर उन्होंने कई सारे असुर तथा दानव का वध किया, सबसे पराक्रमी दानव रावण का वध प्रभु श्री राम के हाथों हुआ।

प्रभु राम का चरित्र

प्रभु श्रीराम सद्गुणों से भरे हुए थे, प्रभु श्री राम दयालु, उदार, सहृदयी थे, प्रभु श्री राम के अंदर मनोरम शिष्टाचार और अद्भुत शारीरिक शक्ति थी, वह इतने अतुल्य और भव्य थे जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। प्रभु श्रीराम अत्यंत महान उदार और निडर थे।

स्वामी विवेकानंद के शब्दों में – प्रभु श्री राम सत्य का अवतार थे, नैतिकता तथा आदर्श पुत्र, एक आदर्श पति, आदर्श राजा थे, जिनकी वजह से उनके कर्मों ने उन्हें ईश्वर की श्रेणी में रख दिया।

महान कवि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में बताया गया है कि राम त्रेता युग आए थे, वाल्मीकि द्वारा रचित पर रामायण में प्रभु श्री राम के बारे में विस्तार रूप से बताया गया है, हिंदू धर्म में रामायण को पवित्र पुस्तक माना जाता है।

प्रभु श्री राम को इस दुनिया में सबसे आदर्श पुत्र के रूप में जाना जाता है, प्रभु श्री राम सैकड़ों गुणों से सर्वश्रेष्ठ थे, उन्होंने कभी भी झूठ नहीं बोला, उन्होंने हमेशा अपनों से बड़ों का सम्मान तथा अपने गुरुओं का आदर किया, इन्हीं वजह से प्रत्येक व्यक्ति प्रभु श्रीराम से प्रेम करते थे, वह हर परिस्थिति मैं आकर्षक और समायोज्य थे, प्रभु श्री राम अपने राज्य के सभी लोगों के दिल में वास करते थे।

प्रभु श्री राम का जीवन

प्रभु श्री राम का जन्म इस धरती पर चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ, जब उनका जन्म हुआ तो पूरे राज्य में खुशियों का माहौल था। प्रभु श्री राम ने बचपन से ही उदार सील, ईमानदार, तथा दूसरों को जीवन की प्रेरणा देने वाले व्यक्ति रहे, माना जाता है कि प्रभु श्री राम का जन्म लोगों को धार्मिकता याद दिलाने के लिए हुआ था।

जब प्रभु श्री राम का बाल काल खत्म हुआ तो महर्षि विश्वामित्र ने प्रभु श्री राम और लक्ष्मण को लेकर मिथिला गए, जहां जनक की बेटी सीता के लिए स्वयंबर आयोजन किया गया था, वहां एक प्रतियोगिता रखा गया, और सभी योद्धाओं से कहा गया कि जो इस प्रतियोगिता को जीतेगा देवी सीता का विवाह उनसे किया जाएगा।

राजा जनक भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे, और उन्हें भगवान शिव से शिव धनुष उपहार में मिला था, स्वयंबर की शर्तें यह थी कि जो भी योद्धा है शिव धनुष को उठाकर इस पर प्रत्यंचा चढ़ आएगा देवी सीता उन्हीं के साथ विवाह करेगी, लेकिन कोई भी शिव धनुष को उठा नहीं पाया।

राजा जनक अत्यंत व्याकुल हो गए, और कहने लगे क्या यह धरती पर कोई ऐसा वीर नहीं है जो इस धनुष को उठा पाए, इस पर प्रत्यंचा चढ़ा पाए, इतने में ही प्रभु श्री राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ दरबार में पधारते हैं, गुरु का आशीर्वाद लेने के बाद प्रभु श्री राम धनुष उठाने के लिए आगे बढ़ते हैं, प्रभु श्री राम धनुष को उठा लेते हैं और प्रत्यंचा चढ़ाते मात्र ही धनुष टूट जाता है, और इस प्रकार प्रभु श्री राम स्वयंवर को जीतकर माता सीता से विवाह करते हैं।

माता सीता से विवाह के बाद जब प्रभु श्री राम अयोध्या वापस जाते हैं तो राजा दशरथ राम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा करते हैं, उनकी सौतेली मां कैकेयी अपने बेटे भरत को अयोध्या का राजा बनता देखना चाहती थी इसलिए माता कैकेयी ने राजा दशरथ से वचन लिया कि वह भरत को राजा बनाएंगे और राम को 14 वर्ष का वनवास भेजेंगे।

अपने पिता के वचन के लिए प्रभु श्री राम, सीता और अपने छोटे भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के वनवास के लिए निकल पड़े, वर्षों वन में बिताने के बाद एक दिन सुपनखा नाम की राक्षसी प्रभु श्रीराम से विवाह करने की इच्छा प्रकट करती है, मगर श्री राम माता सीता को वचन देते हैं कि वह कभी भी दूसरी विवाह नहीं करेंगे, ऐसे में राक्षसी क्रोधित हो जाती है और माता सीता पर जानलेवा हमला कर देती है।

राक्षसी से बचने के लिए कुमार लक्ष्मण राक्षसी का नाक काट देते हैं, राक्षसी महान दानव रावण की बहन रहती है, और जब यह बात रावण को पता चलता है तो वह उनसे प्रतिशोध लेने के लिए तैयार हो जाता है।

एक दिन रावण अपने माया का इस्तेमाल करके माता सीता का हरण कर लेता है, और अपने साथ लंका ले जाता है। प्रभु राम और लक्ष्मण सीता को ढूंढने के लिए बंदरों की सेना तैयार करते हैं, प्रभु श्री राम ने वानर सेना के साथ लंका पहुंचते हैं मगर मार्ग में समुंद्र पड़ता है, तो सभी पत्थर तथा चट्टानों पर श्री राम का नाम लिखकर समुद्र पर राम सेतु का निर्माण करते हैं। यह राम सेतु पुल आज भी विद्यमान है।

प्रभु राम कथा रावण में युद्ध होता है और इस युद्ध में रावण मारा जाता है, इस युद्ध में रावण के साथ रावण का भाई कुंभकरण, और उसका पुत्र इंद्रजीत भी मारे जाते हैं। रावण के 10 सिर थे जिसके कारण से दशानन के नाम से जाना जाता था, रावण को हराने में रावण का भाई विभीषण प्रभु श्री राम की सहायता करते हैं।

जब प्रभु श्री राम का 14 वर्ष का वनवास पूर्ण होता है, तब वह अपने पत्नी तथा भाई के साथ अयोध्या वापस जाते हैं तो सभी प्रजापति इस खुशी में उनका स्वागत दीपों से करते हैं, इसी दिन के बाद से आज तक हम दीपावली का पर्व मनाते हैं।

Conclusion

प्रभु श्री राम एक सर्वश्रेष्ठ उदाहरण पूरी मनुष्य जाति के लिए हैं, प्रभु श्रीराम विनम्र थे, धैर्यवान थे, उनका जन्म धर्म की स्थापना के लिए हुआ था, और उनके किए गए कर्मों की वजह से उन्हें भगवान की उपाधि मिली, प्रभु श्री राम जैसा हो पाना किसी भी मनुष्य के लिए संभव नहीं है। प्रभु श्री राम अपने अंतिम स्वास तक आदर्श पर चलें, दूसरों की सहायता की।

प्रभु श्री राम का परम शिष्य हनुमान को कहा जाता है, प्रभु श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में अलौकिक व्यक्ति थे। भगवान विष्णु का सातवां अवतार जिन्होंने राक्षस रावण का वध करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया वह परम वीर थे।

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