Kader Khan Biography In Hindi – वह सभी लोग जो 90 के दशक में बॉलीवुड की फिल्में देखते थे वह कादर खान को भलीभांति जानते होंगे, क्योंकि उन दिनों कादर खान की बेहतरीन कॉमेडी हर किसी को पसंद आती थी, फिल्म में होने से लोग मान लेते थे किक फिल्म में कुछ ऐसे सीन अवश्य होंगे जिनमें बेहतरीन कॉमेडी होगी।

कादर खान ने अपने जीवन में बॉलीवुड की कई सारी फिल्मों में छोटे-बड़े किरदार निभाए हैं, जिनकी वजह से वह बॉलीवुड में सबसे पसंदीदा अभिनेता में से एक बन गए। कॉमेडी के साथ साथ इन्होंने स्क्रिप्ट राइटिंग तथा डायलॉग राइटिंग का कार्य किया है।

Kader Khan Biography In Hindi

Kader Khan Biography In Hindi – कादर खान की जीविनी

नामकादर खान
जन्मतिथि22 अक्टूबर 1935
जन्म स्थलकाबुल, अफ़गानिस्तान
मृत्यु1 जनवरी 2019
मृत्यु स्थानकनाडा
नागरिकताभारतीय औरत कैनेडियन
मां का नामइकबाल बेगम
पिता का नामअब्दुल रहमान
भाईशामसउर रहमान, फज़ल रहमान, हबीब उर रहमान
बेटेसरफराज और
शिक्षाइस्माइल युसूफ कॉलेज
पेशाफिल्मों में सपोर्टिंग रोल, डायलॉग तथा स्क्रिप्ट राइटिंग।
मुख्य अभिनीत फिल्मेंमास्टर मनी, डोंट वरी, सुनो ससुरजी, नो टाइम फॉर लव, आंटी नंबर वन, साजन का घर, बोल राधा बोल, अदालत आदि।
फिल्मों में लेखनकुली, लावारिस, अमर अकबर एंथनी, अग्नीपथ, उन्होंने शराबी, नसीब आदि।
विवादअनुपम खेर को जब पद्मश्री मिला तब अपनी राय दी।
पुरस्कारबेस्ट फिल्म फेयर कॉमेडी अवार्ड (बाप नंबरी बेटा दस नंबरी), बेस्ट डायलॉग फिल्म फेयर अवार्ड (अंगार)

कादर खान की शुरुआती जीवन

11 दिसंबर 1937 को कादर खान का जन्म काबुल (अफगानिस्तान) मैं हुआ था, पास्थून काकड़ जनजाति से संबंध रखते थे। इनके माता-पिता अब्दुल रहमान और इकबाल बेगम थे और इनके तीन भाई थे, भाई का नाम शामसउर रहमान, हबीब उर रहमान, फज़ल रहमान था।

जब कादर खान 1 साल के थे तब उनके पूरे परिवार मुंबई में आकर रहने लगे हो और वहीं एक झुग्गी झोपड़ी में अपना जीवन जीने लगे, जब कादर खान बड़े हुए तो उन्होंने अजरा खान से शादी की और उनके दो बेटे हुए जिनका नाम शाहनवाज और सरफराज रखा गया।

कादर खान के बेटे शाहनवाज ने दो फिल्मों में निर्देशक सतीश कौशिक को एसिस्ट किया, उनकी फिल्म मिलेंगे मिलेंगे और वादा थी, इसके साथ ही उन्होंने राज कँवर को एसिस्ट किया जब राज कँवर ने हमको तुमसे प्यार है फिल्म का निर्माण किया था।

एक बार सरफराज ने कादर खान के व्यक्तित्व के बारे में मीडिया को बताया, सरफराज ने बताया कि जब वह छोटे थे तब उनके पिता कादर खान उन्हें फिल्म की शूटिंग के सेट पर नहीं ले जाते थे क्योंकि कादर खान नहीं चाहते थे कि उनके बच्चों की पढ़ाई में बाधा आए और उनका ध्यान भटके, यहां तक कि उनके पिता उन्हें फिल्म की मैगजीन तक पढ़ने को नहीं देते थे, उन दिनों सरफराज एक्टिंग करना चाहते थे और जब भी वह अपने पिता को टेलीविजन पर देखते तो बहुत खुश हो जाते थे।

उन्होंने बताया कि उनके पिता 5 दिन काम किया करते थे और महीनों तक के घर से दूर रहते थे जिनकी वजह से उनका पालन-पोषण इनकी मां करती थी, लेकिन कादर खान अपने परिवार के साथ जितना भी पल बिताते हैं वह क्वालिटी टाइम से उनके परिवार के लिए होता था, जब भी सरफराज तथा उनके परिवार को कादर खान की जरूरत होती थी तब कादर खान उनके साथ हमेशा होते थे।

कादर खान फेमस एक्टर और बीजी व्यक्ति नहीं थे लेकिन वह अच्छा इंसान और अच्छे पिता जरूर थे। जब भी उनके परिवार को कादर खान की जरूरत होती है तब वह अपना काम छोड़ कर अपने परिवार के साथ समय बिताते।

कादर खान की शिक्षा

जब छोटे थे तब उन्होंने मुंबई की मुंसिपल स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, स्कूल के दिनों में वह एवरेज छात्र थे और आगे चलकर उन्होंने अपनी शिक्षा इस्माइल युसूफ कॉलेज से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की।

जब उन्होंने अपनी शिक्षा पूर्ण कर ली तब उन्होंने 1970 से लेकर 1975 तक मुंबई यूनिवर्सिटी में पढ़ाया, उन दिनों कादर खान साबू सिद्दीक कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, बईकुला मैं एक सिविल इंजीनियर विभाग के तौर पर प्रोफेसर थे।

कादर खान का फिल्म सफर

1 दिन कॉलेज में वार्षिक उत्सव का फंक्शन था, और उसमें एक प्ले होना था, जब यह बात अभिनेता दिलीप कुमार को पता चली तो उन्होंने उस प्ले को देखने की इच्छा जताई, जब लोगों को इस बारे में पता चला तो उन्होंने उनके लिए विशेष इंतजाम किए और कादर खान ने उनके लिए ले में अभिनय किया, प्ले को देखने के बाद दिलीप कुमार को कादर खान का अभिनय काफी पसंद आया उस प्ले के बाद से ही दिलीप कुमार ने कादर खान को अपनी अगली दो फिल्मों के लिए सेंड कर लिया।

दिलीप कुमार की अगली दो फिल्में बैराग और सगीना महतो थी, उन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में कादर खान जैसे व्यक्ति का का काम करना गर्व और सम्मान की बात थी।

1973 मैं कादर खान का फिल्मी सफर शुरू हुआ, उनकी पहली फिल्म दाग थी। इसके बाद उन्होंने 1981 में नसीब फिल्म में अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, शत्रुघ्न सिन्हा और ऋषि कपूर के साथ कार्य किया।

फिर अगले साल 1982 कादर खान ने अमिताभ बच्चन के साथ सत्ते पे सत्ता फिल्म में काम किया, इसके अलावा इस फिल्म में हेमा मालिनी और शक्ति कपूर भी थे। इसके बाद 1983 में कादर खान ने 4 फिल्मों में काम किया जिनके नाम जस्टिस चौधरी, मवाली, हिम्मतवाला और जानी दोस्त है। इनमें से तीन फिल्मों में कादर खान ने जितेंद्र और श्रीदेवी के साथ काम किया है वही एक फिल्म में (जानी दोस्त) मैं उन्होंने धर्मेंद्र और प्रवीण बाबी के साथ काम किया।

1984 तक कादर खान ने कई सारे फिल्में की, 1984 के बाद उन्होंने नया कदम, अकलमंद, अंदर बाहर, कैदी, मकसद, तोहफा, इंकलाब जैसी फिल्मों में लाजवाब प्रदर्शन किया।

1985 में उन्होंने मास्टर जी, बलिदान, सरफरोश, मेरा जवाब और पत्थर जैसे फिल्मों में अभिनय किया। 1986 में कादर खान की कुछ और फिल्में प्रकाशित हुई जिनमें इंसाफ की आवाज, घर संसार, दोस्ती दुश्मनी, धर्म अधिकार, सुहाग, आग और शोला जैसी फिल्में रही। 1987 में उन्होंने हिफाजत, हिम्मत और मेहनत, वतन के रखवाले, खुदगर्ज, सिंदूर, मजाल, औलाद, जवाब हम देंगे, प्यार करके देखो, और अपने अपने आई जैसे फिल्मों में कार्य किया।

1988 मैं कादर खान में बीवी हो तो ऐसी, इंतकाम, वक्त की आवाज, साजिश, घर घर की कहानी, कब तक चुप रहूंगी, शेरनी, मुलजिम, कसम, दरिया दिल, सोने पर सुहागा, प्यार मोहब्बत, जैसी फिल्मों में अभिनय किया इसके अलावा उन्होंने 1989 उन्होंने चालबाज, काला बाजार, कानून अपना अपना, जैसी करनी वैसी भरनी, गैर कानूनी, बिल्लो बादशाह, वर्दी, हम भी इंसान हैं जैसे फिल्मों में अभिनय किया।

1990 में कादर खान ने कई सारे फिल्मों में अभिनय किया जैसे जवानी जिंदाबाद, अपमान की आग, मुकद्दर का बादशाह, किशन कन्हैया, घर हो तो ऐसा, बाप नंबरी बेटा दस नंबरी, शानदार आदि। फिर 1991 में इनकी फिल्म दिलदार, इंद्रजीत, साजन, कर्ज चुकाना है, प्यार का देवता, खून का क़र्ज़, हम, मर दिल तेरे लिए जैसे फिल्मे की।

1992 मैं इनकी फिल्म बोल राधा बोल, अंगार, सूर्यवंशी, कसक, दौलत की जंग, लुटेरे और नागिन जैसी फिल्म आए, इसके बाद 1993 में तेरी पायल मेरे गीत, शतरंज, धनवान, दिल तेरा आशिक, औलाद के दुश्मन, गुरुदेव, रंग, जख्मों का हिसाब, दिल है बेताब, कायदा कानों, आशिक आवारा, दिल और आगे जैसी फिल्मों में काम किया।

1994 में कादर खान ने घर की इज्जत, मिस्टर आजाद, आग, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, इना मीना डीका, पहला पहला प्यार, अतीश, साजन का घर, राजा बाबू, आजाद, खुद्दार, जैसी फिल्मों में काम किया है। 1995 में इनकी फिल्म ताकत, कुली नंबर वन, हलचल, अनोखा अंदाज, तकदीरवाला, डी डॉन, मैदान-ए-जंग, वर्तमान, सुरक्षा, ओह डार्लिंग जैसे फिल्मे आई।

1996 मे कादर खान की कई सारी और फिल्मे प्रकाशित हुई जिसमें साजन चले ससुराल, रंगबाज, छोटे सरकार, माहिर, सपूत, बंदिश और एक था राजा जैसी फिल्मों में काम किया। 1997 में उन्होंने भाई, शपथ, मिस्टर एंड मिसेस खिलाडी, दीवाना मस्ताना, हमेशा, बनारसी बाबू, जमीर, हमेशा, सनम, हीरो नंबर वन, जुदाई, जुड़वा जैसी फिल्मों में काम किया।

फिर कादर खान ने 1998 में हीरो हिंदुस्तानी, कुदरत, नसीब, बड़े मियां छोटे मियां, दुल्हे राजा, जाने जिगर, घरवाली बाहरवाली, आंटी नंबर वन, हिटलर, मेरे दो अनमोल रतन जैसी फिल्मों में काम किया, इसके बाद उन्होंने 1999 में हिंदुस्तान की कसम, जानवर, हसीना मान जाएगी, जानवर, राजा जी, सिर्फ तुम, अनारी नंबर वन और आ अब लौट चलें जैसे फिल्मों में काम किया।

सन 2000 में इनकी फिल्म तेरा जादू चल गया, धड़कन, क्रोध, आप जैसा कोई नहीं, जोरू का गुलाम, कुंवारा जैसी फिल्में प्रकाशित हुई।

2001 में कादर खान की फिल्म इत्तेफाक प्रकाशित हुई, 2002 में इन्होंने फिर से कई सारी फिल्में की जिसमें अंखियों से गोली मारे, जीना सिर्फ मेरे लिए, मैंने भी प्यार किया है, बधाई हो बधाई, चलो इश्क लड़ाएं, वाह, और तेरा क्या कहना जैसी फिल्मों में 2002 में काम किया।

2003 में कादर खान ने फंटूश और परवाना जैसे फिल्म में काम किया, और 2004 में मुझसे शादी करोगी, कौन है जो सपनों में आया, सुनो ससुरजी जैसी फिल्में की।

2005 में इनकी फिल्म लकी, कोई मेरे दिल में है, खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे जैसे दिल में आए। 2006 मैं इनकी फिल्म जिज्ञासा, उम्र, फैमिली जैसी फिल्में की। फिर 2007 में ओल्ड इज गोल्ड, जहां जाइएगा हमें पाएगा, अंडर ट्रायल जैसी फ़िल्में प्रकाशित हुई।

2008 मैं इनकी एक फिल्म प्रकाशित हुई जिसका नाम महबूबा था, इसके बाद उन्होंने 2013 में दीवाना मैं दीवाना फिल्म प्रकाशित हुई, 2014 में इनके फिल्म उंगली प्रकाशित हुई, 2015 में हो गया दिमाग का दही फिल्म में काम किया, इसके साथ उन्होंने इंटरनेशनल हीरो और लतीफ में भी काम किया। 2016 में कादर खान ने अमन के फरिश्ते फिल्म में किरदार निभाया, फिर 2017 में कादर खान की कादर खान की तबीयत अत्यधिक खराब हो गई जिसके बाद उनकी कोई फिल्म नहीं आई।

कादर खान ने अपने जीवन में 450 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया, और उनमें से 250 से अधिक फिल्मों में उन्होंने खुद डायलॉग लिखें, जब उन्होंने 1974 में रोटी फिल्म के लिए डायलॉग लिखे तो उन्हें अच्छा वेतन मिला था।

अमिताभ बच्चन, फिरोज खान, और गोविंदा जैसे प्रसिद्ध अभिनेताओं के साथ थे उन्होंने अत्यधिक फिल्मी की है, और उनके साथ काम करने पर उन्हें अधिक प्रसिद्धि मिली। कादर खान की कॉमेडी किरदार को अत्यधिक पसंद किया जाता था, कॉमेडी किरदार के पहचान उन्हें डेविड धवन फिल्म के बाद से मिली है।

इसके अलावा कादर खान ने कई सारे सीरियल में भी काम किया है, जिनमें मिस्टर धनसुख, हंसना मत, हाय, पड़ोसी कौन है दोषी, है। 2012 में सब टीवी पर उन्होंने मूवर्स एंड शेखर्स मैं भी काम किया, साथ ही 1991 में आई फिल्म समा को भी प्रोड्यूस किया था।

अगर खान की सेहत और उनकी मौत की अफवाह

सन 2015 में ऐसी खबर मिली कि कादर खान हरिद्वार के पतंजलि योगपीठ में एडमिट है, कादर खान को क्रॉनिक डायबिटीज और साथ ही कुछ अन्य तकलीफ है, और वहां कादर खान को इस दिन रुकने वाले हैं। यह जानकारी रामदेव बाबा के सहायक आचार्य बालकृष्ण ने दी, उन्होंने बताया कि वह कुछ दिन पहले कादर खान से मुंबई में मिले थे, और उन्होंने कादर खान को पतंजलि आकर इलाज करवाने की सलाह दी।

इसके बाद कादर खान के बेटे ने उन्हें पतंजलि में एडमिट करवाया, इन दिनों कादर खान जॉइंट में दर्द की शिकायत रहती थी। जब उनकी तबीयत अधिक खराब है रहने लगे तब सोशल मीडिया पर उनकी मरने की खबरें वायरल होने लगी, उनके सेहत के बारे में जो झूठी खबरें फेल रही थी उसके बारे में उनके सह कलाकार ने खंडित किया, लेकिन फिर भी वह उनकी झूठी खबरों को रोक नहीं पा रहे थे।

उन दिनों उनके प्रशंसकों को उनके मौत के बारे में झूठी खबरें मिल रही थी तब वह सभी चिंतित पर गए थे, इस वजह से कादर खान को दुनिया के सामने आने की जरूरत पड़ गई थी। एक फोटो के माध्यम से कादर खान दुनिया के सामने आए जिसके बाद से लोगों को विश्वास हुआ कि वह अभी तक जीवित है।

दरअसल उन दिनों कादर खान अपने बेटे के साथ कनाडा में थे, शायद इसी वजह से उनकी मरने की अफवाह तेजी से फैल रही थी, कादर खान कनाडा अपने घुटने के इलाज के लिए गए थे। घुटने के ऑपरेशन के दौरान उनका ऑपरेशन सफल नहीं हो पाएगा और इसी कारण से उनका देहांत हो गया।

इन दिनों उनके एक रिश्तेदार और दोस्त ने कहा कि वह सुकुशल है, और साथ ही निर्देशक फोजिया अर्शी ने भी मीडिया को यही बात बताई थी। उन्होंने कहा कि वह तीन चार महीने से कनाडा में है और स्वस्थ हैं, वह कनाडा में इसलिए है क्योंकि उनका बड़ा बेटा वही रहता है। निर्देशक अर्शी ने कादर खान की अंतिम फिल्म दिमाग का दही हो गया को निर्देशित किया था।

परंतु फिर भी कनाडा से लेकर पतंजलि तक इलाज करवाने के बाद भी कादर खान के स्वास्थ्य में किसी भी तरह का कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिला, दिमाग का दही हो गया फिल्म के प्रमोशन में कादर खान को देखा गया था, उस समय महसूस किया गया कि कादर खान को बोलने और चलने में तकलीफ होती है।

शक्ति कपूर ने बताया कि कादर खाना व्हीलचेयर पर है, और इस बारे में बात करना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि मैं कादर खान से संपर्क करने की कोशिश कर रहा हूं और साथ ही वह अभी कनाडा में है अपने बेटे और पत्नी के साथ रहते है।

कादर खान और लेखन

2015 के फिल्म प्रमोशन के दौरान कादर खान ने अपने खुद के लिखें और वर्तमान समय में लेखन के ट्रेंड के बारे में चर्चा की, उन्होंने कहा था अब तो लेखन में काफी परिवर्तन आ गया है, और मुझे लगता है कि मुझे फिर से लेखन का कार्य शुरू कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं जल्दी अपनी पुरानी जुबान मैं लिखने की कोशिश करूंगा। उन्हें विश्वास था कि उनके द्वारा लिखी जुबान में लोग बात करना पसंद करेंगे।

अमर अकबर एंथनी, के फिल्म में जो डायलॉग इस्तेमाल हुए हैं उन्हें आज में कोई भूल नहीं सकता, कादर खान का हमेशा से ही साहित्य में रुझान रहा है मगर जब उन्होंने प्रोफेशनली लिखना शुरू किया तब पूरी दुनिया को उनके टैलेंट के बारे में पता चला। फिल्म आने से पहले ही कादर खान लिखना पसंद करते थे।

कादर खान का एक प्ले था जिसका नाम लोकल ट्रेन था, उस प्ले के माध्यम से कादर खान ने राष्ट्रीय स्तर के कंपटीशन में भाग लिया, उस प्ले को फिल्म मेकर नरेन्द्र बेदी, सिंह बेदी और अभिनेत्री कामिनी कौशल जज कर रहे थे। जब उन्होंने कादर खान का प्ले देखा तो वह उनसे मिले और उन्हें अपनी फिल्म में लिखने के लिए प्रोत्साहित किया।

नरेंद्र बेदी की फिल्म जवानी दीवानी को लिखा और उन दिनों उन्हें 1500 रुपए मिले थे, फिल्म काफी सफल रही और साथ ही कादर खान के लेखन के रास्ते खुल गए। इसके बाद कादर खान ने अपने जीवन में कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

मनमोहन देसाई कादर खान को अपनी फिल्म रोटी के लिए डायलॉग लिखने के लिए कहा, और इससे पहले के फिल्म के डायलॉग लिखने पर जो पैसे मिले थे उनके लिए ताना भी मारा। फिर उन्होंने कुछ और सफल फिल्मों में लिखा जैसे – अमर अकबर एंथोनी, धर्मवीर, गंगा जमुना सरस्वती, नसीब, आदि।

2013 में कादर खान को फिल्म इंडस्ट्री और सिनेमा में योगदान देने के लिए साहित्य शिरोमणि अवार्ड से सम्मानित भी किया गया।

कादर खान के पुरस्कार

उनके अभिनय तथा लेखन कार्य को देखते हुए उनके पुरस्कारों की संख्या काफी कम है, 1984 से लेकर 1999 तक कई सारी फिल्मों के लिए उन्हें 9 बार कॉमेडियन अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था। अमेरिकन फेडरेशन ऑफ मुस्लिम फ्रॉम इंडिया उनके टैलेंट और योगदान को पहचाना।

फिल्म फेयर अवार्ड

  • मेरी आवाज सुनो – फिल्म के बेस्ट डायलॉग लिखने के लिए 1982 में फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
  • बाप नंबरी बेटा दस नंबरी – फिल्म के बेस्ट फिल्म फेयर कॉमेडियन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
  • अंगार – फिल्म के बेस्ट डायलॉग के लिए फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
  • कादर खान को बेस्ट कॉमेडियन का अवार्ड हिम्मतवाला, आज का दौर, सिक्का, हम, आंखें, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, कुली नंबर वन, साजन चले ससुराल, दूल्हे राजा के लिए दिया गया।

कादर खान के विवाद

जब बॉलीवुड सेलिब्रिटी को पद्मश्री मिला तब कादर खान ने बेवकूफ होकर अपनी राय रखी, इसी के बाद से वह सुर्खियों में आने लगे। उन दिनों रजनीकांत, प्रियंका चोपड़ा, एस एस राजामौली, अनुपम खेर, मधुर भंडारकर आदि को पदम श्री अवार्ड दिया गया, इस पर कादर खान ने कहा था – अच्छा हुआ कि मुझे पद्मश्री नहीं मिला, चापलूसी कारण है जिसकी वजह से उनके साथियों को पद्मश्री दिया गया है। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी जिंदगी में कभी चापलूसी नहीं की और ना ही कभी करूंगा।

उन्होंने कहा कि अगर वह मुझे अवार्ड देंगे तो मैं वापस कर दूंगा, कादर खान का विश्वास था कि अवार्ड मिलना कोई बड़ी बात नहीं होती, मगर यह बहुत जरूरी है कि दर्शकों का विश्वास बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि पहले अवार्ड को देने में ईमानदारी पर की जाती थी मगर अब इन पर ध्यान नहीं दिया जाता है। लोग एक दूसरे का कद्र करना भूल गए हैं, और सभी स्वार्थी हो गए हैं। उन्होंने कहा कि मैं दूसरे लोगों जितना योग्य नहीं हूं कि पद्म श्री अवार्ड के लिए चुना जाऊँ।

साथ ही उन्होंने उन लोगों का धन्यवाद किया जिन लोगों ने उनका नाम प्रस्तावित किया। जब अनुपम खेर को पद्म श्री अवार्ड के लिए चुना गया तब कादर खान ने कहा था कि उन्होंने अब तक किया ही क्या है? शिवाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जासूसी करने के अलावा।

पद्म श्री अवार्ड को लेकर कादर खान उन दिनों सुर्खियों में रहे, सोशल मीडिया पर और न्यूज़ में उनके बारे में जमकर बात हुई थी।

कादर खान की राजनीति

कादर खान ने अभिनेताओं के राजनीति में जाने पर अपनी राय रखी थी, उन्होंने कहा था कि जितने भी लोग राजनीति में गए हैं वह सभी वापस लौट आएं। क्योंकि राजनीति उनकी मंजिल नहीं है, पॉलिटिक्स की आप को खत्म कर रही है। एक बार उन्होंने अपनी जिंदगी के दिलचस्प लम्हों को उजागर करते हुए कहा था कि उन्होंने एक बार अपने मित्र अमिताभ बच्चन को भी राजनीति में प्रवेश करने से मना किया था।

कादर खान और अमिताभ बच्चन

कादर खान ने अपने जीवन में कई सारे अभिनेताओं के साथ कई सारी फिल्में की है इस वजह से वह उनके जीवन के टर्निंग प्वाइंट देखा है, जिनमें अमिताभ बच्चन भी शामिल है। 1991 में जब अमिताभ बच्चन की फिल्म हम रिलीज हुई थी, तब अमिताभ बच्चन अगले 5 सालों के लिए ब्रेक लेने वाले थे, और इन्हीं वजह से अमिताभ बच्चन और कादर खान के रिश्ते काफी मजबूत हो गए।

जब कादर खान ने 2015 में बॉलीवुड में फिर से वापसी की थी तब उनके मित्र अमिताभ बच्चन ने उनका स्वागत किया था, अमिताभ बच्चन ने ट्वीट करते हुए लिखा – कादर खान महान सहकलाकार, राइटर है, मेरी कई सारी फिल्मों को सफल बनाने में इनका योगदान रहा है और यह वापस फिल्मों में लौट रहे हैं, वेलकम।

कादर खान की मृत्यु

लंबे समय से बीमार होने के कारण कनाडा में अपना इलाज करवा रहे हैं, दौरान उनकी उम्र 81 वर्ष थी, और कादर खान की मृत्यु 1 जनवरी 2019 को हुई। इस बात की पुष्टि कादर खान के बेटे ने की, उनकी मौत को लेकर कई बार अफवाह उड़ाई गई, जब वह हॉस्पिटल में थे तो सोशल मीडिया पर उनकी मौत की खबरें फेल रही थी, जिस पर उनके बेटे ने आकर सच्चाई का उल्लेख किया था।

Conclusion

कादर खान एक ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने अपने जीवन में सैकड़ों फिल्में की है, उनका किरदार हमेशा लोगों को पसंद आता था, उनका कॉमेडी आज तक लोगों के दिलों में बसा हुआ है। उनके द्वारा लिखी गई फिल्म के डायलॉग आज भी उत्तम डायलॉग में सेट है, कादर खान हमेशा से ही सरल और व्यक्तित्व के अच्छे व्यक्ति थे। जो हमेशा ही लोगों के यादों में रहेंगे।

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