Essay on my City (मेरे शहर पर निबंध)

Essay on my City – मेरा शहर एक ऐसा स्थान है जहां मैंने अपनी पूरी बचपन को जिया है, जहां मेरे सभी जानने वाले है। जहां से मेरी हर एक यादें जुड़ी हुई है। प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक गली, हर मोहल्ला मैं सभी को अच्छे से जानता हूं। मेरा जीवन का एक बहुत बड़ा भाग मेरा शहर है।

ऐसी कई सारी यादें जरूर हुई है जो मरते दम तक भुलाई नहीं जा सकती। मैंने अपना अधिकांश समय अपने शहर की गलियों में गुजारा है, मेरे दोस्त मेरे परिवार सभी की जाति और खुशबू उस शहर में है। मेरे शहर का नाम दिल्ली है, जहां हर तरह की खुशियां और नेकी देखने को मिलती है।

मेरा जन्मदिन शहर में हुआ है, यहां कई सारे ऐतिहासिक किले हैं जो भारतीय संस्कृति और भारतीय कला को दर्शाते हैं। यहां के स्कूल कॉलेज जा मैंने अपनी शिक्षा प्राप्त की है वह सभी खास है। जब भी मैं अपने शहर को छोड़कर किसी और शहर जाता हूं तो, मुझे अपनापन सा नहीं लगता, मुझे मेरी शहर की याद आती है, और जल्द से जल्द वापस आने की कोशिश करता हूं।

वह स्थान जहां मैं अपने दोस्तों के साथ घूमने जाया करता हूं वह सभी खास है। हर साल लाखों की संख्या में यहां पर्यटक आते हैं जिनकी वजह से हमारा शहर हरा-भरा और भरा हुआ दिखाई देता है। उनकी मौजूदगी से हमें लगता है कि हम अकेले है ही नहीं। यहां कई सारे मॉल, स्कूल, यूनिवर्सिटी, सिनेमाघर, होटल और रेस्टोरेंट है, जिनमें हम अक्सर जाया करते हैं। यह सभी अस्थान अपने घर की याद दिलाता है।

Essay on my City

Essay on my City – मॉल भ्रमण

हमारा शहर दिल्ली मोहन और शॉपिंग कंपलेक्स के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है, अक्सर इन मॉल में हजारों की संख्या में हर रोज लोग शॉपिंग करने के लिए आते हैं। विशेष रूप से यहां लोग अपने परिवार और दोस्त के साथ हैं आते हैं जहां शॉपिंग करने के बाद कैंटीन में लोग एक साथ बैठकर खाना खाते हुए दिखाई देते हैं।

देखा जाता है कि यहां आने वाले सभी लोग समय बिताने के लिए आते हैं, अपने परिवार के साथ कुछ पल गुजार सकें इसलिए वह इन शॉपिंग मॉल में दिखाई देते हैं, यहां हर तरह की चीजें मिलती है, सुई से लेकर बड़े-बड़े वस्तु तक यहां आसानी से उपलब्ध हो जाती है। शायद यही कारण है जिसकी वजह से यहां अक्सर भीड़ होती है।

मैं अपने दोस्तों के साथ आ जाता हूं, उस समय उनके साथ बिताने के बाद मैं वापस अपने घर चला जाता हूं, रात का खाना कभी-कभी मैं बाहर ही खा लेता हूं, मेरे परिवार वालों के साथ यह मैं अक्सर यहां आया करता हूं। अपने माता पिता के साथ बैठकर खाना खाता हूं, यहां मुझे खुशी मिलती है, कई प्रकार के खेल भी मैं अपने परिवार वालों के साथ यहां खेलता हूं।

India Essay in HindiCricket Essay in Hindi
Sports Essay in HindiDog Essay in Hindi

फूड़ीज़ डिलाईट

स्ट्रीट फूड के लिए विश्व भर में हमारा शहर जाना जाता है, यहां रास्ते पर बने हुए खाना खाने के लिए लोग दूसरे शहरों से भी यहां आते हैं, हर तरह के खानपान यहां आसानी से उपलब्ध हो जाती है। देसी हो या विदेशी हर तरह का खाना यहां आसानी से मिलता है। मैं अक्सर अपने दोस्तों के साथ यहां मोमोस और पासपोर्ट खाने के लिए आता हूं, और यकीन कीजिए यहां पर खाना सबसे स्वादिष्ट होता है। जिसे मैं मरते दम तक नहीं भूल सकता।

हमारा शहर खाने के लिए विश्व भर मे प्रसिद्ध है, मगर फिर भी मुझे रास्ते का खाना खाने की अनुमति घर से नहीं मिलती, मुझे अक्सर घर का खाना है खाने के लिए कहा जाता है, वैसे भी मेरे घर का खाना काफी स्वादिष्ट होता है जो मेरी मां अपने हाथों से खुद बनाती है।

मेरा शहर दिल्ली

यहां के बाजार पूरे भारत में प्रसिद्ध है, हर चीज सस्ती और किफायती दामों पर आसानी से मिल जाती है। यहां के मंदिर जहां अक्सर लोग श्रद्धा के साथ पूजा करने जाते हैं, और हर शाम को मंदिर में होने वाले आरती सुनाई देती है। जब भी मैं सर को से गुजरता हूं तो मुझे शहर की खुशबू महसूस होती है। खुशबू मुझे इस शहर से जुड़े रखती है, यहां कई सारे ऐसा स्थान है जहां दूर-दूर से लोग घूमने के लिए आते हैं।

यहां कई सारी प्रसिद्ध इमारतें हैं जैसे की कुतुब मीनार, मस्जिद, म्यूजियम, पुस्तकालय आदि। इन संस्थानों को अक्सर पर्यटकों के द्वारा देखा जाता है, जिन वजह से हमारा शहर और प्रसिद्ध हो जाता है।

कई सारे शानदार स्थान यहां देखने को मिलते हैं, चांदनी चौक, चोर बाजार, आदि। मेरे शहर को ठीक से देखने के लिए व्यक्ति को 1 से 2 हफ्ते का समय लगता है, मेरा शहर है इतना खास, मुझे अपने शहर पर गर्व है।

Essay on my City

दिल्ली शहर का इतिहास

दिल्ली सैकड़ों सालों से भारत की राजधानी रही है, यहां कई सारे शासक और राजा, महाराजा दिल्ली की भूमि पर स्वतंत्र रूप से अपना राजपाट स्थापित किए हैं। दिल्ली हमेशा से भारत के लिए खास रहा है और आज भी है। कई तरह के सत्याग्रह और आंदोलन दिल्ली की भूमि पर हुए हैं, मैंने इसकी कई सारी कहानियां सुनी है। दिल्ली सल्तनत से लेकर मुगल सल्तनत तक दिल्ली मुस्लिम सुल्तानों का राजधानी रही है। फिर अंग्रेजों ने इस पर कब्जा किया।

भारत के स्वतंत्र होने के बाद दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित की गई और आज तक यह हमारी राजधानी है, यहां प्रत्येक साल 15 अगस्त को स्वतंत्र दिवस मनाया जाता है।

इस शहर को इस तरह स्थापित किया गया है कि यहां सब कुछ आसानी से उपलब्ध हो जाता है, इसे इस तरह से योजनाबद्ध तरीके से बनाया गया है यह सराहनीय है। वस्तु कला और डिजाइन इस शहर के सर्वोत्तम हैं। सड़क के चारों और पेड़ पौधे लगाए गए हैं जिनकी वजह से छाया मिलती है।

दिल्ली को सिर्फ भारत का ही सबसे पुराना शहर नहीं माना जाता है बल्कि इसे विश्व का सबसे पुराना शहर में से एक माना जाता है। यहां कई सारे सुल्तान जैसे इब्राहिम लोदी, बाबर, शेरशाह सूरी, अकबर, औरंगजेब और भारत के महान राजा पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली पर अपना शासन किया है।

Cow Essay in HindiMy School Essay in Hindi
Health Education Essay in HindiMy Dream Essay in Hindi

यहां के सुंदर स्मारक

हमारा शहर सुंदर स्मारकों के लिए विश्व भर में जाना जाता है, यहां शानदार स्मारक स्थापित हैं जिनका भ्रमण करने के लिए विश्व भर से लोग यहां आते हैं।

लाल किला

दिल्ली का सबसे पुराना स्मारकों में से एक है, जो लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ है, इसे 16वीं शताब्दी में मुगल के द्वारा बनाया गया था।

हुमायूं का मकबरा

हुमायूं का मकबरा को कहा जाता है युवक ताजमहल की प्रतिकृति है, ज्योति लाल बलुआ पत्थर संगमरमर से बनाया गया था। जहां इस्लामी वास्तुकला फारसी शैली देखने को मिलती है।

Essay on my City

लोटस टेंपल

यह मंदिर है जिसे कमल के आकार में बनाया गया है, इसे बनाने में सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। इसमें 9 दरवाजे हैं जो होल की तरफ खुलते हैं। यह इतना बड़ा है कि एक बार में 2500 लोगों को अपने अंदर समा सकता है।

क़ुतुब मीनार

एक और वास्तुशिल्प का नमूना कुतुब मीनार है जिसकी लंबाई 73 मीटर है, इसे कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनाया था। इस इमारत में 5 मंजिल शामिल है।

Holiday Essay in HindiLockdown Essay in Hindi
Road Rage Essay in HindiMy City Essay

Conclusion

मेरा शहर मेरे लिए सबसे खास है, यहां मैंने अपनी पूरी जिंदगी व्यतीत की है, यहां की खुशबू, यहां के लोग सभी मेरे अपने है। मेरे दोस्त मेरे परिवार सभी यहीं रहते हैं और मैं इन्हें छोड़कर कहीं और जा नहीं सकता। मैं जब भी किसी और से हट जाता हूं तुम मुझे अपने शहर अपने घर की याद आती है। यहां सब कुछ है जो एक व्यक्ति को अपने जीवन को ठीक से जीने के लिए चाहिए।

मेरे शहर में कुछ बुराइयां भी हैं मगर प्रत्येक व्यक्ति उसे ठीक करने की कोशिश करता है। सब साथ मिलकर रहते हैं और कभी किसी को मदद की जरूरत पड़ती है तो प्रत्येक व्यक्ति मदद के लिए तैयार रहता है। मेरा शहर मेरी जिंदगी है, मैंने यहां अपनी पूरी जिंदगी बिताई है और उम्मीद करता हूं कि मैं अपने शहर में ही अपनी आखिरी सांस लू।

oosoo
oosoo.co.in एक हिन्दी एजुकेशनल वेबसाईट है, इसके फाउन्डर और इसपे आर्टिकल बिकाश शाह लिखते है। बिकाश शाह एक ब्लॉगर है जो पिछले 3 सालों से इंटरनेट पर आर्टिकल लिखते आ रहे है। अभी ये अरुणाचल प्रदेश मे रहते है, साथ ही ये यूट्यूब पर विडिओ भी बनाना पसंद करते है। अगर आपको इसके बारे मे अधिक जानकारी चाहिए तो आप इनसे कान्टैक्ट कर सकते है। सोशल मीडिया का लिंक आपको about मे मिल जाएगा। इस वेबसाईट के आर्टिकल को पढ़ने के लिए आपका सुक्रिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *