Essay on Man in Hindi – हम सभी ने मनुष्य शब्द को अक्सर सुना है, मगर प्रत्येक व्यक्ति इस शब्द का अर्थ नहीं जानता। मनुष्य का विकास कैसे हुआ और यह प्रजाति अस्तित्व में कैसे आई प्रत्येक व्यक्ति को ज्ञात नहीं है। मनुष्य को इस पृथ्वी का सबसे बुद्धिमान जीव कहा जाता है, मनुष्य ने अपने जीवन को आरामदायक बनाने के लिए कई सारे अविष्कार किए हैं। इसी वजह से मनुष्य इस पृथ्वी पर सबसे मूल्यवान जीवो में से एक है।

मनुष्य हमेशा से ही समूह में रहने के लिए जाने जाते हैं, प्राचीन काल से ही व्यक्ति झुंड बनाकर रहता है। यह कैसी मानवीय व्यवहार है जो कभी बदल नहीं सकती, मनुष्य परिवार, समाज और अपनी संस्कृति के बल पर अपने जीवन को व्यतीत करता है।

Essay on Man in Hindi

मनुष्य सामाजिक पशु है।

मनुष्य एक ऐसी प्रजाति है जो अकेले रह नहीं सकते, मनुष्य समाज के साथ मिलकर ही रहना पसंद करता है। अगर इसे अकेला छोड़ दिया जाए तो यह विचलित हो जाता है, अकेलेपन के कारण मनुष्य के शारीरिक तथा मानसिक स्थिति खराब होने लगती है और कई तरह की बीमारियां उसके अंदर पनपने लगती है। इसीलिए व्यक्ति का संभव नहीं है कि वह अकेले अपने जीवन जी सकें। अपने दोस्त, परिवार इन सभी के साथ व्यक्ति रहना पसंद करता है अपने विचारों को साझा करना पसंद करता है।

लोगों के साथ मिलकर अलग-अलग प्रकार की गतिविधियां करने में व्यक्ति को संतुष्टि और खुशी मिलती है, उसकी भावनाओं और इच्छाओं को एक मुकाम मिलता है। इसीलिए कहा जाता है कि मनुष्य एक सामाजिक पशु है जो समाज के बिना अकेले रह नहीं सकता।

आज से सालों पहले व्यक्ति अपने संयुक्त परिवार के साथ रहते थे, जिसकी वजह से उसे हर तरह के भावनात्मक लाभ मिलते थे मगर वही आज के समय व्यक्ति अकेले रहना पसंद करता है जिसकी वजह से उसका मानसिक विकास ठीक प्रकार से नहीं हो पाता। बड़े बुजुर्गों के साथ रहने में और अकेले रहने में काफी फर्क होता है। युवा पीढ़ी आज के समय स्वतंत्र रहना चाहती है जिसकी वजह से उनके मानसिक और शारीरिक बदलाव हो रहे हैं।

आज के समय युवा पीढ़ी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अकेले रहना पसंद करते हैं पर इसका मतलब यह नहीं है कि वह पूरी तरह से अपने आपको समाज से अलग कर ले, कुछ समय के लिए गोपनीय रहने में और पूरी तरह गोपनीय रहने में फर्क होता है, हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा पल जरूर आता है जब उसे किसी ना किसी व्यक्ति की जरूरत होती है, चाहे अपने विचारों को साझा करना हो या किसी का साथ चाहिए हो।

सोशल नेटवर्क, सोशल मीडिया इन सभी के कारण व्यक्ति आज के समय में ज्यादा से ज्यादा अकेला रहता है। इन सभी के कारण व्यक्ति के मानसिकता पर प्रभाव पड़ता है।

व्यक्ति ने अपने आप को समाज के बनाए हुए चक्र में बांध लिया है, प्रत्येक व्यक्ति को अपना जीवन जीने के लिए कई तरह के सामाजिक गतिविधियों को ध्यान में रखकर चलना पड़ता है। व्यक्ति ने धर्म को बनाया, जाति का निर्माण किया, आर्थिक स्थिति, पंथ जैसे गतिविधियां बनाई जिसके कारण व्यक्ति अपने जीवन को समाज के साथ जोड़कर जी सकें।

एक बार के लिए अगर माल ले कि इस पृथ्वी से जाति, धर्म, समाजिक दूरियां आदि इन सभी को हटा दिया जाए तो व्यक्ति किस आधार पर अपने जीवन को जियेगा। सामाजिक कामकाज, और गतिविधियां व्यक्ति को समाज से जुड़े रखती हैं।

Essay on Man in Hindi – मानव और संस्कृति

प्रत्येक व्यक्ति का व्यवहार उसके परवरिश और संस्कृति पर निर्भर करता है, किस प्रकार के माहौल में व्यक्ति का बचपन देता है और उसने अपने बचपन में क्या सीखा है यह निर्भर करता है। मानव की संस्कृति ही उसे समाज में अलग बनाती है, संस्कृति से ही उसका व्यवहार आका जाता है।

भारत में व्यक्ति अपनी संस्कृति को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं, संस्कृति की वजह से ही व्यक्ति अपने अस्तित्व से जुड़ा होता है। अपने खानपान, वेशभूषा, भाषा, यह सभी व्यक्ति की पहचान बनती है। इसी वजह से प्रत्येक व्यक्ति अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और ज्ञान देते हैं।

भारत की संस्कृति है कि वह किसी भी व्यक्ति का आदर सम्मान दिल से करते हैं, हर तरह के धर्म और जाति का सम्मान करते हैं, शांति तथा खुशहाली से रहने में विश्वास रखते हैं। अपने मूल्य जड़ों से जुड़े होते हुए विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं।

मनुष्य और पर्यावरण

मनुष्य ने अपने सुविधाओं के लिए विज्ञानिक तथा सामाजिक तरक्की की है, मगर इस तरक्की के रास्ते में है मनुष्य ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। औद्योगिक क्रांति समाज के लिए वरदान तो साबित है परंतु यह पर्यावरण के लिए श्राप से कम नहीं, नए-नए चीजों का निर्माण तो व्यक्ति ने किया है मगर उस दौरान पर्यावरण में प्रदूषण को बढ़ावा दिया है।

प्रत्येक दिन व्यक्ति अपने जीवन को सरल बनाने के लिए कई तरह के वस्तुओं का निर्माण करते हैं, वस्तुओं का निर्माण करते वक्त कई तरह के अपशिष्ट पदार्थ पर्यावरण में मिलते हैं जिसकी वजह से पर्यावरण दूषित होती है, पर्यावरण के दूषित होने के कारण व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव पड़ता है।

तेजी से बढ़ती जनसंख्या ने पर्यावरण को संकट में डाल दिया है, लोग अपने घर के निर्माण के लिए जंगलों का सफाया कर रहे हैं, इस वजह से जीव जंतुओं का अस्तित्व इस पृथ्वी से मिट रहा है। पर्यावरण में हो रहे हर बदलाव से व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव पड़ता है। कई तरह की बीमारियां व्यक्तियों में पर्यावरण के दूषित होने के बाद देखने को मिलती है।

आदिकाल का मनुष्य

आज का मनुष्य जिस प्रकार से हर सुख सुविधा से अपना जीवन व्यतीत करते हैं, वैसे आज से हजारों साल पहले के मनुष्य अपना जीवन व्यतीत नहीं करते थे। प्राचीन काल में मनुष्य जंगलों में रहा करते थे, और अपने भोजन के लिए पशु-पक्षियों, फल-पौधों, मछली आदि पर निर्भर रहते थे। हर रोज भोजन करने के लिए व्यक्ति जानवरों का शिकार करते थे, गुफाओं में रहते और पत्तों से बने कपड़े पहनते थे।

भोजन की तलाश में मनुष्य एक स्थान से दूसरे स्थान पर भटकता रहता था, जहां उसे पानी मिलता वही अपना डेरा बसा लेता, और जब एक स्थान पर भोजन खत्म हो जाता तो वह दूसरे स्थान के लिए निकल पड़ता। धीरे धीरे सेवा है व्यक्तित्व और समूह में रहना शुरू कर दिया, जानवरों को पालना शुरू कर दिया, सब्जियां तथा कृषि का कार्य करना आरंभ कर दिया।

अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने पशु पालन करना शुरू किया, और धीरे-धीरे विकसित होते हैं और आज व्यक्ति इतना विकसित हो चुका है कि अपने आराम के लिए तरह-तरह के आविष्कार करता है।

मनुष्य का विकास

अक्सर लोग कहते हैं कि मनुष्य का अस्तित्व बंदरो से हुआ है, हम सभी चिंपांजी से विकसित हुए हैं और हम उसके रिश्तेदार हैं। बहुत सारे ऐसे अलग-अलग शोध हुए हैं जो दर्शाते हैं कि हम बंदरों के वंशज हैं। 1959 में प्रसारित एक लोकप्रिय किताब ओरिजिन ऑफ स्पीशीज मैं यह बताया गया है कि हमारा विकास किस प्रकार हुआ है। हालांकि शोध अभी भी चल रहे हैं।

लाखों समय के बाद मनुष्य बंदरों से विकसित हुए, धीरे-धीरे शरीर में परिवर्तन देखने को मिला, और आज हम पूरी तरह से मनुष्य बंदरों से अलग दिखते हैं।

Conclusion

मनुष्य एक ऐसी प्रजाति है जो विश्व विश्व में सबसे ज्यादा बुद्धिमान और सशक्त है, मनुष्य आज के समय हर नामुमकिन कार्य को मुमकिन कर सकता है। मनुष्य का जीवन अनोखा है, यह समूह में रहना पसंद करते हैं, साथ ही अपने आरामदायक जीवन के लिए तरह-तरह के आविष्कारक अक्सर करते हैं।

मनुष्य के विकास में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है, मगर व्यक्ति चाहे तो अपनी गलतियों से सीख सकता है और पर्यावरण को बचाने के लिए हर मुमकिन कार्य कर सकता है। मनुष्य को समझ पाना संभव नहीं है प्रत्येक व्यक्ति की मानसिकता, विचारधारा अलग होती है, पर मनुष्य इस पृथ्वी पर सबसे महत्वपूर्ण प्राणियों में से एक है।

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