Essay on How I Spent my Summer Vacation in Hindi – गर्मियों की छुट्टी छात्रों के लिए एक सुखद मौका होता है जब वह अपने मन के अनुसार अपने कार्य को कर सकते हैं, ना तो उस पर किसी प्रकार का कोई दबाव होता है और ना ही अध्ययन करने का कोई विकल्प, गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे अपने मनमर्जी के अनुसार सारे कार्य करते हैं अपने रूचि के अनुसार अपने सारे फैसले लेते हैं।

कुछ बच्चे अपनी गर्मियों की छुट्टी बिताने के लिए अपने माता पिता के साथ कहीं घूमने जाते हैं, तो कुछ अपने दोस्तों के साथ नए नए स्थानों को देखने के लिए निकल जाते हैं, ऐसे में हर छात्र का अपना अपना नजरिया होता है, कुछ अपने दोस्तों के साथ खेलना पसंद करते हैं तो कुछ नए स्किल को सीखना पसंद करते हैं।

Essay on How I Spend my Summer Vacation in Hindi

मैंने अपनी छुट्टी कैसे बिताई

गर्मियों की छुट्टी के आने से पहले ही मैंने अपने हर कार्य की सूची बना ली, मैंने पहले से ही फैसला कर लिया था कि मैं इन छुट्टियों में चाचा करने वाला हूं। और जैसे ही मैंने सुना की स्कूल की छुट्टियां शुरू होने वाली है तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था।

मैंने अपनी छुट्टी के कुछ दिन अपने दादा दादी तथा नाना नानी के साथ बिताने का फैसला किया, मैं और मेरी छोटी बहन अपने माता पिता के साथ दादा दादी के घर निकल पड़े, मेरे दादा दादी का घर छोटे से गांव में जहां का वातावरण शुद्ध है और शांति हर तरफ है। मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में मुझे जाना बहुत पसंद है क्योंकि उस छोटे से गांव में मुझे जो शांति और खुशी महसूस होती है वह किसी भी शहर में मिल पाना मुमकिन नहीं है।

गांव में जो जिंदगी लोग जीते हैं वह शहरों के मुकाबले काफी अलग है, असल मायने में गांव में रहने वाले लोग ही जीवन को ठीक तरह से जीते हैं। गर्मियों की छुट्टी में दादा दादी के साथ कुछ छोटे से गांव में मुझे काफी सुकून मिला, मैं और मेरी छोटी बहन अपने माता पिता के साथ उस गांव में कुछ दिन रुके और उस गांव की संस्कृति और परंपरा को करीब से जाना।

हमने वहां मस्ती की, ढेर सारे फल, खाए खेत में घूमे गांव के बच्चों के साथ अलग-अलग तरह के खेल खेले। दादा दादी ने हमें अपने बचपन की कहानियां सुनाएं कैसे उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी खुशी और आजादी के साथ छोटे से गांव में बिताई। दादा दादी हमें परियों की कहानियां सुनाते और छोटी बहन के शराब तो पर खूब हंसते।

दादा जी ने बताया कि एक बार वह आम खाने के लिए आम के भगवानी में चुपचाप चले गए थे, और जब यह बात माली को पता चली तो उसने दादाजी के पीछे कुत्ते को छोड़ दिया था, दादा जी भागते हुए घर आए थे। ऐसे ही कई मजेदार कहानियां और किससे दादा दादी ने सुनाई।

मेरी दादी हस्तशिल्प में माहिर है उन्होंने हमारे लिए कढ़ाई वाले कपड़े तैयार किए, मुझे और मेरी छोटी बहन को काफी पसंद आए। मां ने दादी के लिए सारी खरीदी और दादा के लिए कुर्ता खरीदें, वह कपड़े उन्हें काफी पसंद आए। हमने वहां कई तरह के गतिविधियां की जो हमें पूरे जीवन याद रहेगी।

गांव की संस्कृति

गांव जाने पर हमें पता चला कि लोग अपनी संस्कृति के प्रति कितने निष्ठावान हैं, गांव के लोग अपनी संस्कृति को दिल से मांगते हैं, एक दूसरे का ख्याल रखते हैं तथा एक दूसरे के विचारों का सम्मान करते हैं, गांव में हर तरफ खुशियां ही खुशियां होती है। इसी वजह से मुझे गांव और गांव के लोग काफी पसंद है।

गांव के लोग सुबह जल्दी उठ जाते हैं और प्रातः सुबह योग करते हैं जिनसे वह स्वस्थ महसूस करते हैं, लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति काफी जागरूक हैं अपनी दिनचर्या का अपने समय का सदुपयोग करते हैं। लोग 7:00 बजे से पहले ही अपने सभी कार्य को समाप्त करके अपने दूसरे कार्यों में जुड़ जाते हैं, कुछ लोग सुबह दुकान खोलने चले जाते हैं, तो कुछ अपने खेतों में काम करने के लिए। अधिकतर देखा जाता है कि शहर के लोग अपने समय का उपयोग सही तरीके से नहीं करते मगर गांव में सभी लोग अपना काम समय पर करते हैं।

घर की औरतें घर की साफ सफाई करते हैं, रसोई में खाना बनाने के बाद रसोई की सफाई करते हैं, इसके अलावा अपने परिवार के साथ बैठकर खाना खाते हैं। मेरे चाचा जी गांव में रहते हैं और दुकान में काम करते हैं, चाची ने मुझे दोपहर का खाना चाचा के पास पहुंचाने के लिए दिए थे, मैं और मेरी छोटी बहन चाची से खाना लेकर दुकान की ओर निकल पड़े, चाचा को खाना देखकर वापस आए तो देखा की चाची ने हमारे लिए लस्सी बना रखी थी।

शाम के समय सभी लोग एक साथ बैठ कर बातें करते हैं, गांव के सभी लोग एक दूसरे को अच्छे से जानते हैं इसलिए सभी लोग इकट्ठा होकर अपने बुरे दिन के बारे में एक दूसरे को बताते हैं। गांव का अनुभव मेरे लिए कभी ना भूलने वाला है, गांव की संस्कृति तथा परंपरा त्योहारों के दिन निखर के दिखाई देता है।

गांव के पेड़ के नीचे बैठकर पंचायत सभा का आयोजन होता है जिसमें गांव के समाधान के लिए बड़े बुजुर्ग निर्णय लेते हैं, यह सभी मेरे लिए नया था मगर मुझे यह सब देखकर काफी खुशी हुई।

Essay on How I Spent my Summer Vacation in Hindi – हिल स्टेशन का सफर

गांव से अपने दादा दादी को अलविदा कहने के बाद मैं मेरी छोटी बहन और मेरे माता पिता पहाड़ों पर कुछ दिन बिताने का फैसला करते हैं, जहां हम मसूरी के लिए निकल करते हैं। वहां हमने कई अलग-अलग स्थान को भी घुमा और वहां कुछ दिन रहे। हमने बर्फ गिरते हुए देखा, बर्फ के गोले बनाकर हमने एक दूसरे पर फेंके। इसके अलावा आसपास के सुंदर इलाके भी हम ने देखें जिसमें नैनीताल, ऊटी, मनाली, ऋषिकेश आदि थे।

जब हम मसूरी पहुंचे तो वहां एक छोटे से होटल में एक छोटा सा रूम किराए पर लिए, यहां का प्राकृतिक नजारा देखने योग्य था, हर तरफ ठंडी ठंडी हवा चल रही थी, हर तरफ लोग ही लोग दिखाई दे रहे थे। सबसे पहले हमने ठंड के कपड़े मॉल से जाकर कर खरीदें, इसके बाद हम अलग-अलग पर्यटन स्थल पर घूमने गए जहां हमने अलग-अलग प्रकार की गतिविधियां की।

हम ट्रेन में घूमे और फिर शाम को वापस अपने होटल चले आए जहां हमने एक साथ बैठकर स्वादिष्ट खाना खाए, फिर हमने फिल्म देखने का फैसला किया मैं मेरी बहन और मेरे माता-पिता सभी फिल्म देखने के लिए सिनेमाघर चले गए। जैसे ही फिल्म खत्म हुआ वैसे हम सभी ने फैसला किया कि अब हम वापस अपने होटल में आएंगे और आराम करेंगे।

मैंने संगीत सुना, नृत्य किया, और नए दोस्त बनाएं, मुझे आज भी ऐसा लगता है कि काश मुझे एक बार और फिर से मौका मिल जाता वह समय को जीने का जो मैंने हिल स्टेशन पर बिताई थी।

मेरी पहली विदेश यात्रा

गर्मियों की छुट्टी में मैंने अपने पिता से कहा कि मुझे इस बार छुट्टियों में किसी दूसरे देश छुट्टी मनाने जाना है, मेरे पिता ने मुझसे वादा किया कि वह इस बार मुझे गर्मियों की छुट्टियों में स्विट्जरलैंड ले जाएंगे। मैंने यह बात अपने सारे दोस्तों को बताइए और जैसे ही गर्मियों की छुट्टियां हुई मैं और मेरे माता पिता गर्मियों की छुट्टी मनाने के लिए स्विट्जरलैंड निकल पड़े।

स्विट्जरलैंड का सफर मेरे लिए सबसे यादगार रहा वहां मैंने कई तरह के कार्य किए अलग-अलग गतिविधियां की, विभिन्न विभिन्न प्रकार के क्षेत्रों में घुमा, विशेष रूप में वह स्थान जहां पर बर्फबारी हो रही थी। इसके अलावा हम पहाड़ों पर घूमने गए और वहां कुछ दिन रहे, मेरे माता पिता ने मुझे हर वह चीज दिलाई जो मुझे पसंद थी। समुंदर के किनारे मैं और मेरे माता-पिता घंटों बैठे रहे डूबते हुए सूरज को हमने साथ बैठकर देखा।

विदेश यात्रा मेरे जीवन के लिए एक सबक रहा, जहां मैंने अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए कई बातें सीखी, वह मैंने सीखा लोगों से किस प्रकार बात करते हैं उनके साथ कैसा व्यवहार करते हैं। मैंने वहां कुछ दोस्त बनाएं जो आज भी मुझसे जुड़े हुए हैं। अलग-अलग स्थानों पर घूमने से मैंने जाना कि वहां की संस्कृति और परंपरा क्या है। मैंने उन्हें अपनी संस्कृति और परंपरा के बारे में बताया और उनसे उनकी संस्कृति और परंपरा के बारे में सीखा।

वहां के सुंदर दृश्य मैंने अपने माता पिता के साथ देखें, वहां के जानवर, वहां की इमारतें, वहां के लोग वहां की संस्कृति सभी देखने योग्य थे। कुछ दिन विदेश यात्रा में बिताने के बाद हम वापस अपने देश भारत लौट आए मगर आज भी मुझे वहां के हर चीज याद है।

उम्मीद करता हूं कि जीवन में फिर कभी ऐसा पल आए जब मैं वापस वहां घूमने जाऊं, इसके अलावा में विश्व के सभी देशों में भ्रमण करना चाहता हूं। वहां के बारे में जानना चाहता हूं।

Conclusion

गर्मियों की छुट्टी मेरे लिए सबसे यादगार पलों में से एक है, इन दिनों में ने कई तरह की गतिविधियां की है, अपने दोस्तों के साथ अपने परिवार के हर एक सदस्य के साथ मैंने समय बिताया। मैंने कई नई सारी चीजें सीखी हैं, लोगों से बात करना सीखा है उनके साथ किस प्रकार का व्यवहार करना है यह सीखा है।

मैंने गर्मियों की छुट्टी में कई अलग-अलग जगह पर समय बिताया है जिसकी वजह से मैं वहां के संस्कृति तथा कला से जुड़ा हुआ हूं, गर्मियों की छुट्टी व्यक्ति के लिए एक सुनहरा मौका होता है जब वह अपने लिए समय निकाल सकता है और अपने रूचि के अनुसार कार्य कर सकता है।

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