Essay on Fuel in Hindi (ईंधन पर निबंध)

Essay on Fuel in Hindi – इंधन केक ऐसा पदार्थ होता है जिसके रसायनिक गतिविधियों के कारण ऊर्जा उत्पन्न होती है, और उस उर्जा के जरिए कई तरह के काम किए जाते हैं। ऊर्जा का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए, हीटिंग के लिए, वस्तुओं का उत्पादन करने के लिए, मशीनें चलाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा भी ऊर्जा के कई सारे इस्तेमाल है। गर्मी के रूप में रसायनिक और परमाणु ऊर्जा का उत्पन्न किया जाता है।

उर्जा के कई सारे स्रोत हैं जैसे कि, पेट्रोल, एलपीजी, डीजल, कोयला, लकड़ी, गोबर, मिथेन, कोयला गैस, केरोसिन, आदि। इन के माध्यम से ऊर्जा का निर्माण किया जाता है और उपयोग में लाया जाता है।

कुछ समय पहले इंधन को पदार्थों के रूप में जाना जाता था, कोयला एकमात्र ऊर्जा का स्रोत था, फिर डीजल, पेट्रोल के माध्यम से उर्जा का निर्माण किया गया। परमाणु ऊर्जा का उत्पादन किया जाने लगा, आज के समय हम बिना ऊर्जा के अपना जीवन कल्पना भी नहीं कर सकते।

इंजन विभिन्न प्रकार के होते हैं जिन्हें हर रोज व्यक्ति अपने कार्य के लिए इस्तेमाल करता है। परिवहन सुविधा, उत्पादन, इन सभी के लिए ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है, मूल रूप से उर्जा के कई सारे फायदे हैं मगर वही इसके कई सारे नुकसान भी है।

दिनचर्या के सभी कार्यों को ठीक से करने के लिए ऊर्जा का निरंतर उपयोग किया जाता है, वाहन चलाने के लिए ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है, खाना बनाने के लिए ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है, किसी वस्तु का निर्माण के लिए ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे ही कई सारे कार्य हर रोज व्यक्ति ऊर्जा के बल पर ही करता है।

ऊर्जा के कई सारे गुण होते हैं, इसी आधार पर उन्हें कई श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। कुछ ऊर्जा तरल होते हैं तो कुछ ठोस होते हैं, तो वहीं कुछ ऊर्जा गैस रूप में होते हैं।

Essay on Fuel in Hindi

Essay on Fuel in Hindi – Use of Fuel

व्यक्ति अपने जीवन में विभिन्न विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए अलग-अलग तरह के इंजन का इस्तेमाल प्रत्येक दिन करता है।

पेट्रोल/डीजल/सीएनजी

जब भी कोई वाहन को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना हो तो उसके लिए डीजल, पेट्रोल, और सीएनजी का इस्तेमाल किया जाता है, इन्हीं की उर्जा के स्रोत से इन वाहनों को चलाया जाता है। प्रत्येक दिन मनुष्य इन ऊर्जा का इस्तेमाल अपने कार्य के लिए करता है। प्राकृतिक गैस में से एक पेट्रोल अमूल्य ऊर्जा का स्रोत माना जाता है, इसके उत्पादन में मनुष्य को अधिक लागत लगती है इसलिए यह बहुत महंगी होती है।

रसोई गैस/एलपीजी

लिक्विड पेट्रोलियम गैस जो तरल पदार्थ में होता है, इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खाना बनाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल कमरे को गर्म करने के लिए, पानी को गर्म करने के लिए, और अन्य कामों के लिए किया जाता है। इस तरह के उर्जा से किसी भी तरह का वायु प्रदूषण नहीं होता।

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Types of Fuel

मुख्य रूप से इंधन तीन प्रकार के होते हैं, जिनका वर्णन नीचे विस्तार रूप से किया गया है।

ठोस इंधन

वह सभी पदार्थ जो ठोस रूप में होते हैं और जिनके गर्मी और प्रकाश से उर्जा उत्पन्न होती है उसे ठोस ईंधन कहा जाता है। ठोस ईंधन को अलग-अलग कार्य के लिए इस्तेमाल किया जाता है ओड़िया अलग-अलग रूप में होते हैं जैसे कि कोयला, लकड़ी, पीठ, गोबर आदि। ठोस ईंधन तरल और गैस इंधन के मुकाबले आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं और यह सस्ता भी होता है।

साथ ही देखा जाए तो ठोस ईंधन के कई सारे नुकसान भी हैं, जैसे कि इसके एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसकी थर्मल ऊर्जा बहुत कम होती है, साथी इससे निकलने वाले धुय से पर्यावरण में प्रदूषण भी होता है।

तरल ईंधन

तरल ईंधन यांत्रिक ऊर्जा उत्पन्न करता है, जैसे कि डीजल, पेट्रोलियम गैस, गैसोलीन, आदि। तरल ईंधन का निर्माण प्राकृतिक द्वारा होता है, ठोस ईंधन के मुकाबले यह आसानी से एक जगह से लेकर दूसरे जगह पर ले जाया जा सकता है। इंधन जब चलता है तो बुआ उत्पन्न करता है जिसके माध्यम से पर्यावरण वायु प्रदूषण होता है मगर वही जब तरल ईंधन जलता है तो किसी भी तरह का कोई इराक या धूल उत्पन्न नहीं करता जिसकी वजह से पर्यावरण में राख उत्पन्न नहीं होती।

मगर तरल ईंधन ठोस ईंधन के मुकाबले काफी ज्यादा महंगा होता है यह अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं और इसका का भंडार रखना जोखिम से भरा होता है, साथ ही इनका गंध बहुत बुरा होता है।

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गैस इंधन

किस प्रकार के इंधन गैस के रूप में होते हैं, जो की प्रकृति में आसानी से उपलब्ध होती है। कोयला और बायोमास जैसे ठोस ईंधन से इनका उत्पन्न होता है इसीलिए इन्हें बायोमास गैस और कोयला गैस भी कहा जाता है। लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस इसका एक सटीक उदाहरण है।

इस तरह के इंधन को आसानी से पाइप लाइन के द्वारा एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाया जा सकता है, ठोस ईंधन और तरल ईंधन के मुकाबले गैस इंधन किसी भी प्रकार का कोई भी दुआ उत्पन्न नहीं करती। यह साफ-सुथरे होते हैं, नकारात्मक दृष्टि से देखा जाए तो यह अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं जिसके कारण जोखिम का खतरा बढ़ जाता है। और साथ ही बहुत महंगे होते हैं और उनका भंडार टैंकों में किया जाता है।

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जीवाश्म ईंधन क्या है?

जीवाश्म ईंधन को बनने के लिए लाखों साल का समय लगता है, पशु और पौधों के मृत्यु के बाद इनका शरीर परिवर्तन होता है और ऊर्जा में बदल जाता है, मुख्य प्रकार से या तीन जीवाश्म इंधन होते हैं, कोयला जो ठोस जीवाश्म ईंधन होता है, तेल जो तरल जीवाश्म ईंधन होता है, और प्राकृतिक गैस के रूप में होता है। व्यक्ति हर रोज इनका इस्तेमाल अपने नियमित कार्यों को करने के लिए करता है।

बिजली बनाने के लिए, खाना बनाने के लिए, अपने वाहनों को चलाने के लिए, किसी वस्तु का निर्माण करने के लिए, विभिन्न विभिन्न प्रकारों से इन ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है। इंधन के इस्तेमाल से व्यक्ति का जीवन सरल होता है और कार्य को अधिक तेजी से किया जा सकता है।

मगर फिर भी इंधन के कई सारे नकारात्मक पहलू हैं, जैसे कि अगर इसे असीमित संख्या में इस्तेमाल किया जाए तो यह खत्म हो सकती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकती है। प्रदूषण के बढ़ने में प्राकृतिक इंधन का प्रमुख कारण रहा है। दुनिया भर में यह अलग-अलग क्षेत्र में पाए जाते हैं जैसे कि सऊदी अरब, अमेरिका, रसिया, इंडोनेशिया, कनाडा आदि।

जैव इंधन क्या है?

इनका उत्पादन बायोमास के द्वारा किया जाता है, पौधों और पशुओं के अपशिष्ट का इस्तेमाल करके ऊर्जा का निर्माण किया जाता है। जीवाश्म ईंधन की तरह यह पुराना नहीं होता कुछ रोज पुराना अपशिष्ट इस्तेमाल में लाया जाता है। हालांकि जीवाश्म ईंधन के तुलना में इसका ग्रीन हाउस गैस उत्पादन काफी कम होता है मगर यह जीवाश्म ईंधन की तुलना में काफी महंगा होता है।

यह दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है, प्राथमिक जैव ईंधन और माध्यमिक जैव ईंधन। प्राथमिक जैव ईंधन का इस्तेमाल अप्रसारित रूप में किया जाता है वही माध्यमिक जैव इंधन का इस्तेमाल संसाधित होने के बाद किया जाता है। अगर उदाहरण की बात करें तो जैव ईंधन में हरा डीजल शामिल है।

मुख्य रुप से जैव ईंधन का इस्तेमाल कोयला, डीजल, और गैसोलीन जैसे इंधन का उत्पादन करने के लिए किया जाता है। अमेरिका, अर्जेंटीना, फ्रांस, ब्राजील, चीन, और जर्मनी जैव इंधन उत्पादकों में शामिल है।

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नवीकरणीय इंधन

इस तरह का इंधन एक बार इस्तेमाल होने के बाद अपने आप दोबारा बन सकता है, दोबारा इस्तेमाल किया जा सके इस वजह से यह प्रकृति में संचारी रूप से उपलब्ध होते हैं। हाइड्रोजन ईंधन को नवीकरण इंधन कहा जाता है। सामान्य रूप में इसका उदाहरण समझे तो हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर इसका प्रमुख उदाहरण है।

गेर नवीकरण इंधन

इस प्रकार के इंजन को एक बार इस्तेमाल करने के बाद दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जैसा कि नाम से स्पष्ट होता है कि इन्हें दोबारा उत्पन्न नहीं किया जा सकता। इन्हें बनने में सालों का वक्त लगता है, एक बार खत्म हो जाने के बाद इनकी भरपाई नहीं की जा सकती। इसके अलावा जब इनका इस्तेमाल किया जाता है तो पर्यावरण में अधिक मात्रा में प्रदूषण फैलता है। जलते समय हानिकारक गैस और हाइड्रोक्साइड उत्पन्न करते हैं जो ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनता है।

Save Energy

मनुष्य प्राकृतिक ईंधन को अधिक मात्रा में इस्तेमाल अपने कार्य के लिए करता है, मगर अधिक मात्रा में इस्तेमाल करने के कई सारे नुकसान हैं जैसे कि इन्हें बनने में लाखों साल का समय लगता है, और जिस तेजी से व्यक्ति जिसका इस्तेमाल कर रहा है यह बहुत जल्द पृथ्वी से खत्म हो जाएगी, इसीलिए व्यक्ति को इन ऊर्जा का इस्तेमाल सोच समझ कर करना चाहिए वरना भविष्य के लिए संकट का कारण बन सकता है।

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सावधानी से उपयोग करें

व्यक्ति अपने आप को विकसित करने के लिए ऊर्जा का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रहा है इस वजह से अधिक तेजी से इसकी खपत हो रही है, अगर सावधानी से उपयोग नहीं किया जाए तो यह बहुत जल्द विलुप्त हो जाएगी। ऊर्जा का इस्तेमाल व्यक्ति को अपने काम के अनुसार ही करना चाहिए, जहां ऊर्जा की जरूरत नहीं है वहां फिजूल में ऊर्जा को बर्बाद नहीं करना चाहिए।

होशियार बने

प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, ऊर्जा का इस्तेमाल नियमित रूप से करना होगा, ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जाए जिसमें कम ऊर्जा की लागत होती है। ऊर्जा को बचाने के लिए नियमित मात्रा में इस्तेमाल करना प्रत्येक व्यक्ति का धर्म होना चाहिए, इसी के कारण हम भविष्य के लिए अपने अमूल्य ऊर्जा को बचाए रख सकते हैं।

हिंदुस्तान में इंधन का उत्पादन

हिंदुस्तान मैं विभिन्न प्रकार के इंधन का इस्तेमाल किया जाता है, सुचारू रूप से इंधन का इस्तेमाल अपने कार्य के लिए किया जाता है, अधिक मात्रा में भारत दूसरे देशों से इंधन का आयात करता है। मगर फिर भी भारत में कई ऐसे स्थान हैं जहां इंधन का उत्पादन होता है जैसे कि असम, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड आदि।

Conclusion

इंधन एक अमूल्य प्राकृतिक वस्तु है जिसका इस्तेमाल व्यक्ति को सोच समझ कर करना चाहिए, इसके अनेक फायदे तथा नुकसान दोनों हैं मगर फिर भी व्यक्ति इसका इस्तेमाल अपने कार्य के लिए करता है। व्यक्ति को इसका इस्तेमाल अपने कार्य को बढ़ाने के लिए करना चाहिए और कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए।

हमारी जिंदगी बिना इंधन के कल्पना भी नहीं की जा सकती आज के समय हर एक वस्तु इंधन के माध्यम से ही काम करता है। इसलिए इसे बचाए रखना इंसानों के लिए बहुत जरूरी है।

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