Essay on Cancer in Hindi (कैंसर पर निबंध)

Essay on Cancer in Hindi – कैंसर एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के कोशिकाओं का अत्यधिक विकास होने लगता है, सही समय पर इस रोग का पता चल जाए तो इसका इलाज करना संभव है मगर वही इस बीमारी के बारे में देर से पता चले तो इंसान की मृत्यु भी हो सकती है। गरीब लोगों के लिए कैंसर जैसी बीमारियां मौत के समान है क्योंकि गरीब अपना इलाज नहीं करवा सकते, इसका इलाज के लिए बहुत सारे पैसे लगते हैं।

इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सावधान रहना चाहिए, और समय-समय पर अपने शरीर की जांच करवानी चाहिए। शुरुआती लक्षण के आधार पर कैंसर जैसी बीमारी को जाना जा सकता है और इसका इलाज करना भी संभव है।

असामान्य तरीके से जब कोशिकाओं का विकास शरीर के अंदर होता है वही पूरे शरीर में फैलने लगता है, शुरुआती चरणों मैं ही इसका इलाज किया जाए तो इसका इलाज करना संभव है और व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।

Essay on Cancer in Hindi

Essay on Cancer in Hindi – Symptom

कैंसर जैसी बीमारी शरीर के अंदर एकदम से नहीं बनती है, इसके शुरुआती लक्षण के आधार पर जाना जा सकता है कि कैंसर शरीर के अंदर कितना फैला हुआ है, शुरुआती लक्षणों को देखकर और जांच कर इसका इलाज करना संभव है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पता होना चाहिए कि कैंसर के लक्षण क्या होते हैं।

वजन घटना

बिना कोई कठोर परीक्षण किए अगर व्यक्ति के शरीर का वजन घट रहा है तो यह कैंसर के शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकता है, अगर किसी व्यक्ति का वजन जल्दी से कम हो रहा है तो उसे अपने डॉक्टर से सलाह परामर्श लेनी चाहिए और कैंसर की जांच करवानी चाहिए।

थकान

किसी भी व्यक्ति को थकावट महसूस होना एक आम बात होती है मगर बिना किसी कठोर परिश्रम के शरीर में थकावट महसूस होती है तो व्यक्ति को अपने डॉक्टर से सलाह परामर्श करनी चाहिए।

खासी

1 हफ्ते से अधिक हर व्यक्ति को खासी है और खांसी ठीक नहीं हो रही उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए अपने डॉक्टर से सलाद परामर्श लेना चाहिए हो सकता है कि यह कैंसर के शुरुआती लक्षणों में से एक हो।

मल त्याग में परिवर्तन

अगर मल/मूत्र में खून देखने को मिलता है, या कोई और बदलाव दिखाई देता है जैसे कि कब्ज, पेट दर्द, दस्त, तो यह कैंसर के शुरुआती लक्षणों में सिलेक्ट हो सकती है।

लंबे समय के घाव

लंबे समय तक शरीर में कोई घाव है वह इलाज के बाद भी कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिलता तो यह कैंसर के शुरुआती लक्षणों में से एक है, इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए अपने डॉक्टर से सलाम लेना चाहिए।

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घाट संरचना

अगर किसी व्यक्ति को स्तन के समीप गठन या या कोई और समस्या होती है तो यह कैंसर के शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकता है, उसकी जांच करवानी चाहिए।

Essay on Cancer in Hindi

Prevention of Cancer

शुरुआती लक्षणों के आधार पर और डॉक्टर के सलाह के बाद व्यक्ति को पता चल जाए कि उसे कैंसर है तो उसका इलाज करना संभव है, मगर किसी व्यक्ति को कैंसर जैसी बीमारी ना हो इसलिए उसके दिनचर्या में कुछ ऐसे परिवर्तन लाने होंगे जिसके बाद कैंसर जैसी बीमारी व्यक्ति को कभी नहीं हो सकता।

पानी पीना चाहिए

स्वस्थ जीवन के लिए हर व्यक्ति को भरपूर पानी का सेवन करना आवश्यक है, बराबर मात्रा में पानी पीने से मूत्राशय का कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है, क्योंकि पानी में बने वाली एजेंटों कैंसर जैसी बीमारियों को कम करता है। हर व्यक्ति को हर रोज कम से कम आठ गिलास पानी पीना चाहिए।

स्वस्थ आहार

हर व्यक्ति को ताजा और स्वस्थ खाना अपने भोजन में लेना चाहिए, हरी सब्जियां, अनाज, दाल, यह सभी का सेवन करने से जीवन शैली स्वस्थ रहती है और कैंसर जैसी बीमारियों से व्यक्ति को छुटकारा देती है।

हरी सब्जियां

हरी सब्जियों में मैग्नीशियम अधिक मात्रा में होती है, जो कैंसर से लड़ने में व्यक्ति को शक्ति प्रदान करती है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने भोजन में हरी सब्जियां खाना चाहिए।

आहार में ब्राज़ील नट्स शामिल करें

ब्राज़ील नट्स में सेलेनियम की मात्रा अधिक होती है जो मूत्राशय, फेफड़े और कोलोरेक्टल कैंसर को बढ़ने से शरीर में होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने भोजन में ब्राज़ील नट्स शामिल करना चाहिए।

कॉफी

कहा जाता है कि दिन में 5 या उससे अधिक कप कॉफी पीने से मुंह और गले के कैंसर को कम किया जा सकता है और उसे बढ़ने से रोका भी जा सकता है।

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व्यायाम

हर सूरत हर व्यक्ति को व्यायाम करना चाहिए, इसके शरीर पर कई तरह के फायदे देखने को मिलते हैं, निरंतर व्यायाम करने से मनुष्य का शरीर स्वस्थ रहता है और किसी भी तरह की बीमारी से लड़ने में शक्ति होती है।

पेट भर खाना ना खाए

अक्सर देखा जाता है लोग पेट भर खाना खाने का सलाह देते हैं, मगर पेट भर खाना खाने से सांस लेने में तकलीफ होती है, जैसे कि गले का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा तंबाकू, सिगरेट और शराब से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

Essay on Cancer in Hindi

Steps of Cancer

कैंसर के चार चरण होते हैं, अगर व्यक्ति को शुरुआती दिनों में ही पता चल जाए तो इसका इलाज करना संभव है। और अगर इसका ज्ञात देर से हो तो यह रोगी के लिए घातक साबित हो सकता है। प्रत्येक व्यक्ति को पता होना चाहिए कि कैंसर के कितने चरण होते हैं।

चरण 1

प्रथम चरण में कैंसर शरीर में विकसित होने की कोशिश करता है।

चरण 2

दूसरे चरण में ट्यूमर का आकार शरीर में बढ़ने लगता है, हालांकि उसके आसपास के ऊतकों में खेला नहीं होता है, चरण 2 का अर्थ होता है कि कैंसर की कोशिकाएं शहर में बढ़ गई है और ट्यूमर लिम्फ नोड्स में खेल चुकी है।

चरण 3

चरण 3 में ट्यूमर का आकार बहुत बढ़ जाता है, और इसके आसपास के ऊतकों में पूरी तरह खिल जाता है। कैंसर की सभी कोशिका लिम्फ नोड्स मैं हर तरफ फैल जाती है।

चरण 4

अंतिम चरण में कैंसर की कोशिकाएं पूरे शरीर में फैल जाती है, जिससे मेटास्टैटिक कैंसर कहते हैं।

कैंसर के चरण जरूरी क्यों है?

कैंसर के चरण का पता होनी चाहिए रोगी के उपचार में मदद मिलता है, उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति कैंसर के प्रथम चरण में है तो उसका इलाज किया जा सकता है, और आसानी से जाना जा सकता है कि कैंसर उसके शरीर में किन किन स्थानों तक फैल चुका है।

अगर कैंसर की कोशिकाएं टूट गई है और लिम्फ नोड्स तक प्रवेश कर चुकी है तो इसका अर्थ होता है कि कैंसर तीसरे चरण तक पहुंच चुका, और उसी के अनुसार रोगी को इलाज की जरूरत है। इसके अलावा अगर कैंसर शरीर के अन्य भागों में फैल गया है तो यह आवश्यक हो जाता है कि डॉक्टर को पता हो कि रोगी का कैंसर कितने चरण में प्रवेश कर चुका है। सामान्य शब्दों में कहा जाए इस चरण के माध्यम से कैंसर के बारे में जाना जा सकता है और सही इलाज किया जा सकता है।

Essay on Cancer in Hindi

Types of Cancer

100 से भी अधिक प्रकार की कैंसर मनुष्य के शरीर में पाई जाती है, नीचे सूची के माध्यम से कुछ मुख्य कैंसर के प्रकार के बारे में बताया गया है।

फेफड़ों का कैंसर

फेफड़ों के अंदर की कोशिकाओं में इस प्रकार के अंदर देखा जाता है, फेफड़ों के कैंसर के मुख्य लक्षण होते हैं जैसे की सूखी खांसी, खून की खासी, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द और वजन का घटना। या मुख्य दो प्रकार के होते हैं।

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स्तन कैंसर

यह महिलाओं में देखा जाता है, हालांकि यह पुरुषों में भी पाया जा सकता है, इस तरह के कैंसर में स्तन मे गाठ पड़ जाती है, निप्पल से तरल निर्वाहन होने लगता है और स्तन का आकार भी परिवर्तित होता है।

त्वचा कैंसर

इसे आम प्रकार का कैंसर कहा जाता है, हर साल लाखों लोगों में इस तरह का कैंसर देखने को मिलता है। मुख्य रूप से धूप में ज्यादा देर रहने से इस तरह का कैंसर होता है। त्वचा कैंसर को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है, पहला जो बाहरी परत दिखाई देता है और दूसरा जो अंदर की कोशिकाओं में दिखाई देता है।

मेलानोमा

यह भी एक प्रकार का त्वचा कैंसर है, जो त्वचा में मेलेनोसाइट कोशिकाओं में बनता है। यह त्वचा कैंसर में सबसे खतरनाक है।

प्रोस्टेट कैंसर

जो भी पुरुष 50 वर्ष से अधिक के हैं उनमें इस प्रकार के कैंसर देखने को मिलता है, यह प्रोस्टेट ग्रंथि के अंदर विकसित होता है, यह प्रजनन प्रणाली का हिस्सा है, यह धीरे धीरे बढ़ता है और अचानक से तेजी से बढ़ जाता है। इसकी कोशिकाएं शरीर के अन्य भागो तक आसानी से कर सकती है।

गुर्दा कैंसर

इस प्रकार का कैंसर गुर्दे की नलिका में होता है, इसके दो सम्मानित प्रकार होते हैं पहला रेनल सेल कार्सिनोमा और दूसरा ट्रांज़िशनल सेल कार्सिनोमा, इस प्रकार का कैंसर 40 वर्ष से अधिक लोगों को होता है। हालांकि यह बच्चों में भी देखा जा सकता है।

मूत्राशय कैंसर

जिस प्रकार का कैंसर है मूत्राशय के ऊतकों के भीतर पाया जाता है, किसी व्यक्ति को पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता है या पेशाब करने में दर्द और पेशाब में खून दिखाई देता है तो यह कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

ल्यूकेमिया

चार अलग प्रकार के ल्यूकेमिया होते हैं, मायलोयॉयड ल्यूकेमिया, क्रोनिक मायलोइड ल्यूकेमिया, तीव्र लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया और क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया। इस प्रकार का कैंसर मज्जा या ऊतकों के अंदर पाया जाता है जो रक्त कोशिकाओं का हिस्सा होता है। इसीलिए इसे रक्त कैंसर भी कहा जाता है।

Conclusion

कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जो शरीर के कोशिकाओं में पाया जाता है, प्रारंभ में ही अगर जिसका ज्ञात हो जाए तुम इसका इलाज करना संभव है, शुरुआती लक्षणों के आधार पर इसका पता लगाया जा सकता है। कैंसर के कुछ शुरुआती लक्षण होते हैं जैसे कि, वजन का घटना, थकान महसूस होना, खांसी में खून आना, लंबे समय एक घाव का ठीक ना होना।

इस बीमारी को आसानी से हराया जा सकता है अगर व्यक्ति अपनी दिनचर्या और अपने खानपान में परिवर्तन लाएं, प्रत्येक व्यक्ति को पौष्टिक आहार अपने भोजन में सेवन करना चाहिए, अपनी जीवनशैली को बदलना चाहिए, जैसे ही व्यक्ति को लगे उसके अंदर कोई परिवर्तन आ रहा है अपने डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

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