Cow Essay in Hindi – पूरे विश्व में गाय एकमात्र ऐसा पशु है जिसकी तुलना देवी से की जाती है, खासकर कर भारत में गाय को माता कहा जाता है, इसके कई सारे कारण है जैसे कि गाय से प्राप्त होने वाले अनेकों लाभ व्यक्ति के जीवन को सरल बनाता है। शायद इसी वजह से गाय को पूरे विश्व में सबसे अधिक प्रेम किया जाता है।

सैकड़ों सालों से गाय का पालन व्यक्तियों के द्वारा होता रहा है, शायद इसी वजह से आज के समय हर घर में गाय देखा जाता है, कहां जाता है कि गाय को आने वाली संकट का पता चल जाता है, सभी संकटों को गाय भाप लेती है, और अपने परिजनों को सतर्क करती है। भारत में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है, जिसकी वजह से यहां के लोग उनकी पूजा करते हैं, गाय को कभी भी एक पशु नहीं समझा जाता भारत के लोग इसे अपना परिवार का सदस्य समझते हैं।

हर मंगल कार्य में गाय को सर्वप्रथम भोजन दिया जाता है, उसके बाद ही अन्य व्यक्ति भोजन ग्रहण करते हैं। गाय से मिलने वाली कई सारी सुविधाएं व्यक्ति अपने लिए इस्तेमाल करता है मगर फिर भी गाय और व्यक्ति अत्यधिक नजदीक है। गाय व्यक्ति को कई सारी चीजें देती है जैसे कि, दूध, दही, गोबर, आदि। इसके अलावा गाय के मूत्र से औषधि का निर्माण भी किया जाता है जो व्यक्ति अपने जीवन में निरोग रहने के लिए इस्तेमाल करता है।

Cow Essay in Hindi

Cow Essay in Hindi – गाय की संरचना

अगर गाय की शारीरिक संरचना की बात की जाए तो इनके दोस्त सिंग होते हैं जिसका इस्तेमाल अपने बचाव के लिए किया जाता है, चार पैर होते हैं, दो आंखें, दो नथुने, दो कान, चार थन, एक मुंह, और एक लंबी पतली पूछ होती है। अपने खुरो की सहायता से गाय को चलने में मदद मिलती है, उनके खुर जोतने का कार्य करती है, साथ ही चोट तथा घाव से बचाव भी करती है।

वैसे तो पूरे विश्व में गाय की कई तरह की प्रजातियां पाई जाती है मगर सामान्य रूप से सभी गाय एक जैसे ही दिखते हैं, शारीरिक बनावट में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है मगर सभी गाय की शारीरिक संरचना एक जैसी होती है।

भारत में ही गाय की कई सारी प्रजातियां पाई जाती है, भारत की गाय की प्रजातियों में सहिवाल, है जो की मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, और बिहार में पाई जाती है, गिर दक्षिण काठियावाड़ मैं पाई जाती है। थारपारकर जैसलमेर, जोधपुर, और कच्छ मैं पाई जाती है। देवनी आंध्र प्रदेश और कनार्टक मैं पाई जाती है। नागौरी राजस्थान के नागौर मैं पाई जाती है। सीरी दार्जिलिंग और सिक्किम के पर्वतीय स्थान में पाई जाती है।

नीमाड़ी मध्य-प्रदेश में पाई जाती है। मेवाती हरियाणा में पाई जाती है। हल्लीकर कर्नाटक में पाई जाती है। भगनारी पंजाब मैं पाई जाती है। मालवी और गावलाव मध्यप्रदेश में पाई जाती है। वेचूर केरल मैं पाई जाती है। कृष्णाबेली महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश में पाई जाती है।

गाय की दूध की उपयोगिता

बच्चों के लिए गाय का दूध अत्यधिक पौष्टिक से भरा होता है, नवजात शिशु जिसे सिर्फ मां का दूध पीने के लिए कहा जाता है उसे भी गाय का दूध पिलाया जा सकता है। हर उम्र के व्यक्ति के लिए गाय का दूध हमेशा ही लाभदायक होता है। कई सारे रोगों से लड़ने में व्यक्ति को ताकत प्रदान करती है गाय का दूध। हर रोगी, हर व्यक्ति को गाय का दूध पीने की सलाह दी जाती है। शायद इसी वजह से गाय का महत्व व्यक्तियों में अत्यधिक है।

डॉक्टर, वैज्ञानिक, और बड़े बुजुर्ग सभी ने गाय की दूध रोजाना पीने की सलाह दी है, इसके अलावा गाय के दूध से बने अन्य पदार्थ भी व्यक्ति को काफी लाभ पहुंचाती है, दूध से बनी दही, मक्खन, पनीर, छाछ सभी सेहत के लिए लाभदायक होती है। गाय का दूध रोजाना सेवन करने से व्यक्ति के अंदर सारे विकास होता है।

कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति को अनिद्रा की शिकायत है तो घी के दो बूंद नाक में डालने से इस बीमारी से ठीक हो सकते हैं, साथ ही रात को तलुओं में घी लगाकर सोने से अच्छी नींद आती है।

गाय का घी धार्मिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जब भी हवन पूजा की जाती है तो गाय का घी इस्तेमाल में लाया जाता है। हजारों सालों से गाय का घी पूजा के लिए इस्तेमाल किया जाता है, वैज्ञानिक का मानना है कि गाय का घी जब हवन में डाला जाता है तब महत्वपूर्ण गैस निकलती है जिसकी वजह से वातावरण शुद्ध होता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में गाय अर्थव्यवस्था का मुख्य कारण होता है, लोग गाय का दूध बेचकर अपना जीवन यापन करते हैं और अपनी सभी जरूरतों को पूर्ण करते हैं। गाय का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में होने की वजह से ही लोगों में गाय की महत्व अत्यधिक है।

गाय के प्रकार

साहीवाल

वैसे तो पूरे विश्व में गाय के सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती है, मगर भारत में गाय की मुख्य कुछ प्रजातियां हैं जो अत्यधिक प्रचलित हैं। व्यक्ति इन गायों का पालन पोषण करते हैं और इन से प्राप्त होने वाले सभी लाभ उठाते हैं।

गाय की प्रजाति विभिन्न क्षेत्रों के जलवायु पर निर्भर करता है, उनकी शारीरिक संरचना प्रकृति पर निर्भर करता है। जो गाय जैसे वातावरण में सैकड़ों सालों से रहता आया है उसकी शारीरिक संरचना उसी प्रकार बन चुकी है।

साहीवाल

गाय की यह प्रजाति भारत में सर्वश्रेष्ठ प्रजाति मानी जाती है, मुख्य रूप से या उत्तर प्रदेश में, बिहार में, हरियाणा और पंजाब में पाई जाती है। सालाना 2000 से 3000 लीटर दूध देती है, और अगर इसकी अच्छी से देखभाल की जाए तो इससे अधिक भी दे सकती है।

गिर

यह प्रजाति गुजरात के गिर जंगलों में पाई जाती है, इसी वजह से इसका नाम गिर है। भारत में यह गाय सबसे अधिक दूध देती है। सामान्य रूप से प्रतिदिन 50 से 80 लीटर दूध दे सकती है, इसी वजह से विदेशों में भी इस गाय की अत्यधिक मांग होती है।

लाल सिंधी

लाल रंग के होने के कारण इस गाय का नाम लाल सिंधी पड़ा है, कर्नाटक, तमिल नाडु, जैसे क्षेत्रों में यह गाय मुख्य रूप से पाई जाती है। और सालाना 2000 से 3000 लीटर दूध देती है।

राठी नस्ल, कांकरेज, थारपरकर

गाय की नस्ल मुख्य रूप से राजस्थान के क्षेत्रों में मिलती है, जो प्रतिदिन 6 से 8 लीटर दूध देती है। जोधपुर और जैसलमेर में अत्यधिक दिखाई देती है।

दज्जल और धन्नी प्रजाति

यह प्रजाति पंजाब में मुख्य रूप से मिलती है, काशीपुर फुर्तीली और ताकतवर होती है। मगर यह ज्यादा दूध नहीं देती।

मेवाती, हासी-हिसार

हरियाणा के क्षेत्रों में मुख्य रूप से मेवाती, हासी-हिसार गाय दिखाई देती है, कृषि के कार्यों में इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से किया जाता है।

Conclusion

पूरे विश्व में गाय एकमात्र ऐसा पशु है जिसकी तुलना किसी भी अन्य पशुओं से नहीं की जा सकती, यह अपने आप में सर्वश्रेष्ठ है। भारत में इसे माता का दर्जा दिया जाता है, साथ ही गाय को सर्वाधिक पाला जाता है। गाय के दूध से होने वाले लाभ व्यक्ति अपने लिए इस्तेमाल करता है, घी, दूध, दही, मक्खन आदि का उपयोग मुख्य रूप से रोजमर्रा की जिंदगी में किया जाता है।

इसके अलावा गाय मरने के बाद भी व्यक्ति को कई तरह के लाभ देती है, इसी वजह से हम सभी को गाय की सुरक्षा और सेवा करनी चाहिए। गाय की वजह से ही हम सभी का बचपन स्वस्थ बीतता है और हम सभी तंदुरुस्त रहते हैं।

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