Agriculture Essay in Hindi – किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य कारण कृषि होता है, हमारे देश भारत का भी अर्थव्यवस्था का मुख्य कारण कृषि है, भारत के 70% लोग कृषि का कार्य करते हैं। भारत में प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी कृषि के कार्य में जुड़ता जरूर है, कृषि से व्यक्ति को जीवन जीने की कला सीखने को मिलती है।

प्रत्येक व्यक्ति की भूख मिटाने की शक्ति कृषि में है, किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य कारण कृषि को कहना गलत नहीं होगा, कृषि के माध्यम से ही व्यक्ति हर तरह की फसल, फल और सब्जी, फूलों की खेती, पशुपालन, आदि प्रकार के क्रियाएं करते हैं। कृषि का कार्य अगर व्यक्ति करना छोड़ दें तो व्यक्ति का जीवन एक दिन के लिए भी चल नहीं सकता।

पेट भरने वाले किसान दिन रात मेहनत करके कृषि का कार्य करते हैं ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपना पेट भर सके, मगर इस संसार में पेट भरने वाले किसान को कितना सम्मान दिया जाता है?

Agriculture Essay in Hindi

Agriculture Essay in Hindi – कृषि क्या है?

कृषि एक ऐसी प्रथा है जिसके माध्यम से खाद पदार्थों की उत्पादन की जाती है, संपूर्ण मानव जाति का अस्तित्व कृषि के ऊपर टिका है, प्रत्येक जीव जंतु, व्यक्ति की आवश्यकता भोजन होती है, व्यक्तियों को भोजन कृषि के माध्यम से मिलता है। कृषि आज से लाखों साल पहले व्यक्ति ने करना शुरू किया, कृषि के दौरान ही व्यक्तियों ने पशुपालन की प्रथा को भी जाना।

जो भी व्यक्ति कृषि का कार्य करता है, उसे किसान कहा जाता है। कृषि के माध्यम से ही किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में बदलाव आता है, कृषि अगर ना हो तो व्यक्ति को फल, मांस पर निर्भर होना पड़ेगा।

कृषि की विशेषताएं

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए कृषि महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जब व्यक्ति कृषि का व्यापार करता है तो कई तरह से आर्थिक लाभ अपने देश को पहुंचाता है। साथ ही रोजगार के क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाता है। आज के समय कई सारे ऐसे युवा हैं जो कृषि के क्षेत्र में उत्तम प्रदर्शन कर रहे हैं, कृषि को अपने कैरियर के रूप में चुना है।

आजीविका का स्रोत

कृषि रोजगार प्रदान करती है, इसी कारण से कई सारे व्यक्तियों को खेतों में काम मिलता है जिसकी वजह से बेरोजगारी की समस्या कम होती है, कृषि के माध्यम से लगभग 25% रोजगार की समस्या देश में कम देखने को मिलती है।

मानसून पर निर्भरता

कृषि की एक विशेषता यह है कि अगर अच्छा मौसम रहे तो कृषि की पैदावार अच्छी होती है, यानी समय पर बरसात होना, समय पर धूप निकलना, अगर मौसम साथ ना दे तो कृषि का कार्य दुर्लभ हो जाता है।

श्रम गहन खेती

जैसे-जैसे हमारे आसपास जनसंख्या बढ़ रही है, वैसे वैसे इसके कारण धरती पर दबाव बढ़ रहा है। जिसकी वजह से जब भूमि को जोता जाता है तविश के छोटे-छोटे टुकड़े हो जाते हैं, ऐसे में मशीनरी उपकरण का इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है।

बेरोजगारी

कृषि एक ऐसा कार्य है जो कुछ माह ही किया जाता है, जिसके कारण कुछ महीने ही व्यक्तियों को कार्य मिलता है बाकी समय वह बेरोजगारी में अपना समय व्यतीत करते हैं।

जोत का छोटा आकार

जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े होने के कारण इसे जोतना काफी मुश्किल हो जाता है, इसके अलावा इसमें खेती करना भी आसान नहीं रहता।

उत्पादन के पारंपरिक तरीके

आज भी ऐसे कई सारे स्थान है जहां परंपरागत तरीके से खेती का कार्य किया जाता है जिसकी वजह से पर्याप्त मात्रा में फसलों का उपज नहीं हो पाता, जिसकी वजह से कृषि का कार्य अधिक तेजी से बढ़ नहीं रहा है। और इसी कारण से खेती और फसलों की पैदावार पर्याप्त नहीं है।

कम कृषि उत्पादन

कृषि उत्पादन की बात करें तो भारत में सबसे कम कृषि उत्पादन होता है, भारत में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगभग 27 कुंटल की उत्पादन होती है, वहीं अगर फ्रांस की बात की जाए तो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 71 कुंटल का उत्पादन होता है, और ब्रिटेन में 80 कुंटल का उत्पादन होता है। इसी वजह से भारत में कृषि का कार्य पिछड़ा हुआ है।

खाद्य फसलों का प्रभुत्व

भारत में अधिकतम गेहूं, चावल और बाजरे की खेती की जाती है, यह लगभग 75% पूरे भारत में है, और सिर्फ 25% ही खेती वाणिज्य फसलों के लिए किया जाता है। इन कारणों की वजह से कृषि का कार्य भारत में पिछड़ा हुआ है।

कृषि के प्रकार

कृषि का कार्य प्रत्येक क्षेत्र, और स्थान पर अलग-अलग तरीके से किया जाता है। इसलिए कृषि के कई सारे प्रकार होते हैं।

पशुपालन

इसके अंतर्गत किसान पशुओं को पालने पर ज्यादा जोर देते हैं, और कृषि का कार्य करने वाले व्यक्ति वेस्टिज जीवन जीते हैं।

वाणिज्यिक वृक्षारोपण

इस प्रकार की खेती वाणिज्यिक मूल के आधार पर किया जाता है, इस तरह की खेती काफी महत्वपूर्ण होती है। इसमें चाय, रबड़, कॉफी, ताड़ का तेल आदि प्रकार के कृषि उत्पादन किए जाते हैं। इस तरह की खेती मुख्यता अफ्रीका, एशिया, लेटिन अमेरिका के कुछ हिस्से में देखा जाता है।

भूमध्यसागरीय कृषि

बीहड़ इलाकों में इस तरह की खेती की जाती है, जहां मुख्य रूप से गेहूं और खट्टे फल को उगाया जाता है साथ ही छोटे जानवरों का पालन पोषण भी होता है।

अल्पविकसित गतिहीन जुताई

इस प्रकार की खेती निर्वाह रूप से किया जाता है यह बाकी अन्य किसी भी कृषि प्रथा से अलग है, क्योंकि इसमें एक ही भूखंड पर सालों तक एक ही प्रकार का फसल लगाया जाता है, इनमें कुछ फसल के अलावा रबर के पेड़, आदि को भी उगाया जाता है।

दूध उत्पादन

इस प्रकार की खेती के लिए बाजार के समीपता और समशीतोष्ण जलवायु अनुकूल होनी चाहिए, इस प्रकार की खेती डेनमार्क और स्टूडेंट जैसे देशों में अधिकतम किया जाता है।

झूम खेती

यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के द्वारा इस प्रकार की खेती की जाती है, मुख्य रूप से यह दक्षिण पूर्व एशिया के इलाकों में रहने वाले लोग करते हैं, इसमें अनाज के विभिन्न विभिन्न प्रकार के फसलों पर अधिक जोर दिया जाता है। मगर आज के समय इस तरह के खेती में गिरावट देखने को मिलती है।

वाणिज्यिक अनाज की खेती

इस प्रकार की खेती कब की जाती है जब फसलें मौसम की वजह से खराब हो जाती है, इसमें मशीनीकरण उपकरणों का इस्तेमाल करके कम वर्षा तथा कम आबादी वाले क्षेत्र को खेती करने योग्य बनाया जाता है।

पशुधन और अनाज की खेती

जब पशुपालन कृषि दोनों एक साथ किया जाए तब इस प्रकार की खेती देखने को मिलती है, इसमें आमतौर पर खेती तथा पशुपालन निश्चित रूप से देखा जाता है। इस प्रकार की खेती मध्य अक्षांशों में की जाती है, इसे यूरोपीय प्रकार की खेती के नाम से भी जाना जाता है।

Conclusion

कृषि एक ऐसा कार्य है जो आर्थिक विकास में मदद करता है, लोगों के जीवन को सरल बनाने में मदद करता है, किसी भी उद्योग उत्पादन के लिए कृषि महत्वपूर्ण है।

भारत में अधिकतम लोग खेती का कार्य करते हैं, मगर अच्छे से कृषि उत्पादकों का उत्पादन नहीं कर पाते, कई सारे इसके कारण है। सरकार तथा व्यक्ति को कृषि के क्षेत्र में उन्नति के लिए कई सारे कदम उठाने होंगे, जिसकी वजह से कृषि भारत में महत्वपूर्ण कार्यों में से एक बन जाएगा।

कृषि की व्यवस्था जिस देश में भी अच्छी होती है उस देश की उन्नति दिन प्रतिदिन बढ़ती जाती है, इसीलिए भारत में भी कृषि का कार्य पर ध्यान देना प्रत्येक व्यक्ति का फर्ज है। अधिक से अधिक लोगों को कृषि के कार्य में जुड़ना चाहिए, आज के मॉडर्न युग में व्यक्ति कृषि के कार्य को करना पसंद नहीं करता, ऐसे में ना तो व्यक्ति का उत्थान होगा और ना ही देश का। प्रत्येक व्यक्ति को कुछ समय कृषि के कार्य के लिए प्रतिदिन निकालना चाहिए।

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